दिल और दिमाग की जंग
हमारी कहानी का वह बेदर्द हिस्सा
जब दिल दिमाग से युद्ध कर बैठा था
और जब युद्ध दिल दिमाग
के बीच हो तो बेशक
मसला इश्क का होगा
हर कहानी की तरह
इश्क की दास्तां हमारा
दिल भी रचने लगा था
हलचल सी मचने लगी थी
उसमें किसी अजनबी को देखकर
जब दस्तक दिल में इश्क ने दी
तो रातों की नींद छिनने लगी थी
बेवजह मुस्कुराने की वजह मिल गई थी
उस शख्स के इश्क में डूबी
आंखें हजारों ख्वाब देखने लगी थी
बहक उठा था दिल
केवल उसी को पाने की ज़िद कर बैठा था
लेकिन दिमाग को कहा
दिल का मसला समझ आने वाला था
नादान पागल न जाने क्या-क्या हमारी
मोहब्बत को नाम देने लगा था
दिल उसकी छवि बुनने लगा था
और दिमाग उस छवि को ठोकर मारने लगा था
दिल उसे पाने की चाहत करने लगा था
और दिमाग उसकी हर याद को भुला देने पर लगा था
दिल जिद्दी बन बैठा था
और दिमाग सनकी हो चुका था
इस दिल दिमाग की जंग में
हमारी मोहब्बत की जड़ उखड़ने लगी थी
बेशक हर कहानी में
दिल आखिर जीत ही जाता है
मगर हमारी कहानी में दिमाग
ने जंग जीत ली, हार गया दिल
टूट गई हमारी मोहब्बत की डोर
फिर दिल तन्हां हो गया और
दिमाग हमारे बिखरे दिल से
इश्क की तरफ जाने वाला
हर रास्ता बंद करने लगा
अब नहीं होती दिल की
हर दफा दिमाग से लड़ाई
क्योंकि दिल हार बैठा है
और दिमाग इस बेजान शरीर पर
राज करने लगा है ||
#रूद्रा
लेबल: इश्क, कविता संग्रह, दिमाग, दिल


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