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गुरुवार, 13 अक्टूबर 2022

body sheming

इंसान नहीं मजाक हूं मैं
जिसे दुनिया अतरंगी नामों से पुकारती है
सांवला सा रंग है मेरा
कद काठी भी कुछ खास नहीं
दिखने में मोटी सी हूं
नाक भी थोड़ी टेडी है
आंखें पूरी खुलती नहीं
ना गालों पर डिंपल पड़ते हैं
चाल में अदाएं नहीं
बातों में मिठास नहीं
ना गुलाब की पंखुड़ियों से होठ है
दांत भी मोती से चमकीले नहीं
ना पतली सी कमर है
ना सुरीली सी गर्दन
ना बदन से सुलगते अंगारे
ना खूबसूरत झील सी निगाहें
बेढगी से बाल है
कपड़े पहनने का सलिका भी नहीं
ना किसी की नजर मुझ पर ठहरती है
ना मुझे देख कोई आहे भरता है
शायद यही वजह है कि दोस्तों के मजाक का विषय हूं मैं
रिश्तेदारों की तानों का हिस्सा
घरवालों की शर्मिंदगी की वजह
दुनिया की नजरों में इंपरफेक्ट हूं मैं,,,,

गोरी,,, अठारह वर्षीय एक लड़की जो अभी अपने शब्दों को कविता का रूप देने की कोशिश कर रही थी कि किसी के दरवाजा खटखटाने की आवाज  सुन उसने अपनी डायरी तकिए के नीचे छुपाई और आंखों से आंसू पोछकर आईने में खुद को देखा और चेहरे पर हल्की सी दर्द भरी मुस्कुराहट उभर आई लेकिन आंखें रोने की वजह से अभी भी लाल थी उसने आंखें बंद की और गहरी सांस लेते हुए खुद से बोली = बस अब नहीं.. अब तू बिल्कुल नहीं रोएगी, अब एक भी आंसू तेरी आंखों से नहीं बहना चाहिए तुझे तेरे महादेव की कसम है,,,
गोरी ने अपनी आंखें खोली फिर आईने पर नजर पड़ गई और आसू खुद ब खुद बाहर निकल आए,,,
सांवला रंग था उसका, उस पर भी जगह-जगह धब्बे थे लंबाई भी कुछ खास नहीं थी और शरीर में मोटी थी, घुंघराले बाल जिनमें ऊपर सफेद कलर के बाल मोतियों से चमक रहे थे,,,,
गोरी फुर्ती से आईने के सामने से हट गई और जाकर दरवाजा खोला, दरवाजे पर उसकी छोटी बहन किरण खड़ी थी किरण अंदर आकर बेड पर पर चढ़ते हुए बोली,,,
दीदी बाहर आपकी सहेली निशिका मिली थी वह कह रही थी कि आप कल कॉलेज की फ्रेशर पार्टी में नहीं जा रहे
नहीं मेरी इच्छा नहीं है....,, गोरी ने संक्षेप में जवाब दिया और लेट गई
ऐसे कैसे इच्छा नहीं है आप तो कितना एक्साइटेड थी ना फ्रेशर पार्टी को लेकर फिर अचानक क्या हुआ
किरण के सवाल पर गोरी के जहन में अपने दोस्तों की बातें घूमने लगी,,,

तो डन गाइस कल सब प्रेशर पार्टी में शॉर्ट्स पहन कर आ रही हो,.... पांच छ लड़कियों के ग्रुप में से एक लड़की बोली, ग्रुप में गोरी भी उनमें ही साथ खड़ी थी सब ने हां में सिर हिला दिया,,
उनमें से एक लड़की गोरी के कंधे पर हाथ रख कर बोली= हम सबका तो ठीक है पर गोरी को शॉर्ट्स कहां से मिलेगा, शॉर्ट ड्रेस भी इसके तो लार्ज साइज में ही आती है,,,
उसके कहते ही लड़किया एक साथ हंसने लगी और गोरी भी मुस्कुरा दी,
गौरी बाई चांस तुझे शॉर्ट ड्रेस मिल भी जाए तो कलर थोड़ा ढंग का चूज करना, पिछली बार की तरह रेड मत पहन कर आ जाना तुम पर वह सूट नहीं करता और ब्लैक और वाइट तो बिल्कुल मत पहनना.... दूसरी लड़की ने कहा,,, और प्लीज बालों को कलर कर लेना,,,,
गोरी बाहर से उनकी बातों पर मुस्कुरा रही थी पर अंदर ही अंदर उसे घुटन महसूस हो रही थी फिर भी वह मुस्कुरा कर बोली= ठीक है समझ गई और ड्रेस थोड़ी लूज ही पहनूंगी ताकि फटने का डर नहीं रहे
कहकर गोरी हंसने लगी और बाकी लड़कियां भी,,,,

दीदी कहीं आप ड्रेस के बारे में तो नहीं सोच रही ना.... किरण की बात सुन गोरी होश में आई,,,
आई नो पक्का ड्रेस की प्रॉब्लम ही होगी वैसे मेरे पास ड्रेस तो है लेकिन आप पर फिट नहीं बैठेगी
गौरी ने किरण की तरफ देखा और अपने आंसू रोकते हुए बोली= कोई जरूरत नहीं है और कहां ने मेरी इच्छा नहीं है जाने कि, मुझे यह फंक्शन पसंद नहीं पता है ना तुझे अब तू सो जा मैं पानी लेकर आ रही हूं,,,

गोरी कमरे से बाहर आई और सीधा छत पर आकर रुकी उसे अंदर घुटन हो रही थी वह ऊपर छत पर एक कोने में बैठ गई और मुंह पर हाथ रखकर जोर जोर से रोने लगी,, कुछ देर रो लेने के बाद उसने अपने गले में पहने महादेव के लॉकेट को मुट्ठी में पकड़ा और मन ही मन उनसे शिकायतें करने लगी,,
आपने मुझे ऐसा क्यों बनाया, क्यों मैं सबकी तरफ परफेक्ट नहीं हूं, लोग क्यों मुझे बार बार यह एहसास दिलाते हैं कि मुझ में कुछ कमी है, आप ही बताइए मैं लंबी नहीं हूं गोरी नहीं हूं, पतली नहीं हूं तो इसमें मेरा क्या दोष है, क्या मैं अपनी अपनी सेप साइज चेंज कर सकती हूं... नहीं ना... चाहते हुए मैं कुछ नहीं कर सकती फिर लोग क्यों हंसते हैं मुझ पर, बताइए ना महादेव क्या मैं इंसान नही हूं, सब अपने अकॉर्डिंग ही क्यों जज करते हैं, जो मन में आए बोल देते हैं क्या उन्हें बिल्कुल एहसास नहीं होता कि जब वह मुझे मेरी कमियां गिनाते हैं तो कैसा लगता है मुझे,,,
मैं पढ़ाई में अच्छी हू, अच्छी इंसान हूं,  इन बातो की कोई इंपॉर्टेंस नहीं, किसी के लिए भी कुछ भी करने की तैयार रहती हूं लेकिन किसी को भी वह सब नजर नहीं आता, नजर आता है तो यह है कि मेरा रंग सांवला है मैं नाटी हूं मोटी हूं, सुंदर नहीं दिखती,
क्या जिंदगी जीने के लिए इंसान को बॉडी की शेप साइज कलर की चेकलिस्ट पर खरा उतरना जरूरी है, 

गोरी आधे घंटे तक वहीं बैठे बैठे सोचती रही फिर खुद को शांत कर कमरे में आकर लेट गई,,,

आज गोरी के घर में फंक्शन था रिश्तेदार और मेहमान आए हुए थे गोरी की दोनों बहने किरण और सुरभी मेहमानों से मिल रही थी लेकिन गोरी बहुत कम कमरे से बाहर आ रही थी रिश्तेदार उसके लिए विलेन की तरह थे वह जानती थी कि वह बाहर उनके सामने गई तो वह कैसे कैसे सवाल पूछेंगे
अरे गोरी तू तो दिन दिन और छोटी होती जा रही है जमीन में दसेगी क्या
गोरी बेटा थोड़ी बहुत डाइटिंग पर ध्यान दिया कर, जानती है ना आजकल के लड़कों को पतली लड़कियां पसंद आती है
बेटा तू ना चेहरे पर हल्दी और मुल्तानी मिट्टी लगाया कर उससे चेहरे पर निखार आएगा
निखिल जी की दो बेटियां तो सोना है बस गोरी ही पता नहीं ऐसी क्यों पैदा हो गई, कभी-कभी तो शक होता है यह इनकी बेटी है भी या नहीं"

ऐसे तरह-तरह के सवाल सुनते हुए ही गोरी बड़ी हुई थी और आज भी रिश्तेदारों के इन सवालों का सामना करने से बचने के लिए गोरी बाहर नहीं आ रही थी लेकिन मम्मी की आवाज सुनकर उसे बाहर आना ही पड़ा,,,
वह बाहर आकर सबकी नजरों से छुपते हुए एक और आकर खड़ी हो गई जहां किसी की नजर उस पर ना जाए, कितना अजीब था ना बचपन में फंक्शंस का नाम सुनते ही वह उछलने लगती थी और फंक्शन जब खुद के घर में हो तो खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं होता था, रिश्तेदारों से मिलने का, बच्चों के साथ खेलने का इंतजार रहता था क्योंकि बचपन में कोई इतना जज नहीं करता था लेकिन आज उसे फंक्शन के नाम पर पहले से ही डर लगने लगता था कि सब इकट्ठा होंगे, उसे उसकी बॉडी को लेकर जज किया जाएगा सबके सामने इंपरफेक्ट फील करवाया जाएगा जिसको जो कमी दिखेगी बोल कर चला जाएगा, इन सब की वजह से पूरा परिवार होने के बावजूद गोरी खुद को तन्हा महसूस करती थी,,,,
कॉलेज के दोस्तों के नाम पर सिर्फ एक लड़की थी जिसके साथ गोरी कंफर्टेबल महसूस करती थी मजाक मजाक में वह भी गोरी को कह देती थी कि हम दोनों साथ में चलते वक्त अच्छे नहीं लगते ऐसा लगता है मैं किसी स्कूल की बच्ची के साथ चल रही हूं ,,उसके सवाल पर गोरी सिर्फ मुस्कुरा कर रह जाती थी,,
कॉलेज लाइफ जिंदगी का वह फेज होता है जिसमें हर तरह की फीलिंग्स जकड़ लेती है अट्रैक्शन, प्यार, दोस्ती मस्ती, इन सब से बाहर जैसे कुछ हो ही नही, गलत और सही का कोई अंदाजा नहीं होता, उसके लिए उसकी चुनी गई राह ही सही होती है फिर चाहे वह गलत ही क्यों ना हो, सब की नजर उस पर ही आकर ठहरे, उसे सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंस मिले फिर इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े और अपोजिट अट्रैक्शन जिसे नाम दिया जाता हैं प्यार का वह तो नशे की तरह जकड़ लेता है, इस फीलिंग्स से बचना सबसे मुश्किल होता है,,,
गोरी भी उम्र के उसी दौर में थी, उसकी फ्रेंड से लेकर क्लास की हर लड़की कमिटेड थी और इसलिए सब गोरी के सिंगल होने पर उसे डम समझते थे, ये तो फैक्ट है की कॉलेज लाइफ में सिंगल होना भी एक शर्मिंदगी जैसा है। गोरी भी क्लास के एक लड़के को पसंद करती थी लेकिन उससे कह पाने की कभी हिम्मत नहीं होती थी यह सोच कर कि सब की तरह उसने भी उसे जज किया तो अगर उसने उस लड़के को अपनी फीलिंग बता दी तो पूरी क्लास उस लड़के का भी मजाक बना देगी, यह सोचकर वह अपनी फीलिंग को छुपा लेती लेकिन अपनी फीलिंग को छुपाए रखना उसके लिए कितना मुश्किल था यह वही जानती थी।।।

गोरी ने इन सबके बीच खुद को पढ़ाई में पूरी तरह झोंक दिया था क्योंकि उसका मानना था कि वह सक्सेस हो जाएगी तो सबका मुंह बंद हो जाएगा, कितने सारे एग्जाम्पलस देखे थे, लोगो ने जिन जिन ने कमियां निकाली वो लाइफ में कुछ कर सबका मुंह बंद कर देते है  वो अपनी कमियों को अपनी ताकत बना लेते हैं, गोरी को भी लगता था कि अपनी सारी कमियों को अपनी ताकत बनाएगी कुछ ऐसा कर के दिखाएगी जिंदगी में कि किसी को मौका ही नहीं मिलेगा उसकी बॉडी को लेकर उसे ताने मारने का,,
वह रात दिन किताबे लिए बैठी रहती थी लेकिन किस्मत ने यहां भी उसका साथ नही दिया, उसका कॉन्फिडेंस इतना गिर गया था कि वह सबके सामने खड़ी होकर प्रेजेंटेशन भी नहीं दे पाती थी वही उसकी क्लास की लड़कियां बिना पढ़े भी कॉन्फिडेंटली प्रेजेंटेशन देकर चली जाती थी, टीचर्स का ध्यान भी गोरी पर नहीं जाता था, इन सबके चलते गोरी का हौसला, उसका सेल्फ कॉन्फिडेंस उसकी इनर वैल्यूज सब खत्म धीरे-धीरे खत्म होने लगी और इसका नतीजा यह हुआ कि स्कूल में टॉप करने वाली गोरी कॉलेज के पहले साल में ही कुछ सब्जेक्ट में फेल हो गई,,,
उसके फेल होने की वजह किसी को मालूम नहीं पड़ी ना किसी ने जानने की कोशिश की, बल्कि दोस्तों रिश्तेदारों और परिवार से बस एक ही बात सुननी पड़ी, भगवान ने शक्ल सूरत तो नहीं दी लेकिन अक्ल तो दी थी उसका भी सही से इस्तेमाल कर लेती तो जिंदगी सुधर जाती है,,,
गोरी की कमियों में उसका फेलियर भी शामिल हो गया था, पढ़ाई के नाम पर थोड़ी-बहुत तारीफ सुनने को मिल जाती थी लेकिन सब खत्म होने लगा था।
कई बार गोरी ने खुद को खत्म करने का सोचा लेकिन परिवार के बारे में मां पापा के बारे में सोचकर वह रुक जाती, कितनी चोट पहुंचा लेती थी खुद को, कभी भगवान के सामने रोते हुए अपने हाथ जला लेती थी ताकि वह उसका दर्द समझे, कभी ब्लेड से हाथों को काट लेती कभी रात रात भर रोती रहती, सब से छुपकर सुंदर दिखने के नए-नए नुस्खे अपनाती, वजन कम करने के लिए खाना कम कर दिया, चाहे भूख से उसकी जान निकलती हो, सब के सो जाने के बाद दौड़ लगाती ताकि कोई देखकर हंसे नहीं, जहां से उसे जैसे उपाय मिले, किसी ने बताए वो सब उसने ट्राई किया लेकिन शरीर में कोई बदलाव नहीं आता, कैसे जैसे कर कॉलेज खत्म हुई, , आगे कहीं जाकर नौकरी करने की हिम्मत ही नहीं थी उसमे, इसलिए घर से बाहर निकलना बंद कर दिया घर को ही उसने अपना एक कंफर्ट जॉन बना लिया था, ताकि दूसरो की नजरे उसे देख उसका मजाक ना बनाए,
शादी की उम्र हुई, घरवाले ने रिश्ते देखना शुरु किया, एक दो रिजेक्शंस के बाद गोरी की सगाई तय हुई,,
24 साल की गोरी आईने के सामने बैठी तैयार हो रही थी क्योंकि सगाई थी उसकी,  लड़के को सिर्फ फोटो में देखा था उम्र थोड़ी ज्यादा थी सावला और मोटा सा था लेकिन गोरी को कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उसे तो परफेक्ट मैन की तलाश भी नहीं थी, दूसरी वजह यह भी थी की बाकी लड़कियों की तरह गोरी जैसी इंपरफेक्ट लड़कियों के लिए हैंडसम और परफेक्ट लड़कों के सपने देखना तो जैसे गुनाह था और अगर उन्होंने लड़के को लेकर अपनी डिमांड रख भी दी तो सब उन्हीं पर हंसने लगते थे कि परफेक्ट लड़का चाहिए तो खुद को भी परफेक्ट होना चाहिए इसीलिए गोरी ने कोई शर्त नहीं रखी थी कि उसे कैसा पार्टनर चाहिए और किसी ने गोरी से यह सवाल पूछा भी नहीं था,,,,
गौरी की सगाई हुई, वह खुश थी की अब जिंदगी का नया दौर शुरू हो रहा है तो अब कोई उसे जज नहीं करेगा वह सुकून से जिंदगी जी पाएगी, उसका पति उसे लेकर कभी शर्मिंदगी महसूस नही करेगा लेकिन उसे नहीं मालूम था कि बॉडी सैमिंग का सही मतलब उसे शादी के बाद समझ आने वाला था, नई बहू को देखने आई आसपास की औरतों रिश्तेदारों के मुंह से अपने शरीर रंग रूप की बनावट पर टिप्पणियां सुन उसे समझ आ गया था कि उसकी जिंदगी आगे भी आसान नहीं होने वाली, वह सुनती रही लेकिन उसकी सारी उम्र हिम्मत तब टूट गई थी जब शादी के कुछ साल बाद ही ससुराल वाले और जिसके साथ खुशहाल जिंदगी के सपने देख कर वो आई थी उसी पति ने बात बात पर उसके रंग रूप को लेकर उसे ताने देना शुरू कर दिया,, हर आदमी को एक परफेक्ट पत्नी चाहिए फिर चाहे वह खुद कैसे भी हो, गोरी के साथ भी ऐसा ही होने लगा था उसका पति चाहे कैसा भी हो लेकिन अब उसे गोरी को अपने दोस्तों से मिलाने में भी झिझक होती थी, कुछ सालो में ही इसी वजह से गौरी के साथ झगड़े और मारपीट शुरू होने लगे थे, कोई नही था जो उसका साथ देता, मायके जाती तो उसकी कमियों को लिस्ट में एक ये भी जुड़ जाता की गृहस्ती भी नहीं संभाल पाई, सुंदर होती तो पति भी दिलजस्पी लेता, इस तरह की औरत से तो दूर ही भागेगा, सारे रास्ते बंद हो चुके थे और अब गोरी में हिम्मत नहीं बची थी लोगो का सामना करने की, उसे समझ आ गया था की लोगो की सोच कभी नहीं बदल सकती,,,,

आखिर तंग आकर गोरी ने एक दिन अपनी जिंदगी खत्म कर ली, खुद को आजाद कर लिया इस समाज से और यहां के लोगो के ताने से,,,,किसी को वजह तक पता नहीं चली कि उसने ऐसा क्यों किया क्योंकि बाहरी तौर पर तो वह ठीक ही थी असली लड़ाई तो उसकी खुद के भीतर थी जिसे लाख कोशिशों के बाद भी वह जीत नहीं पाई।।।।।

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बॉडी शमिंग.... एक ऐसी बीमारी जो लोगों की छोटी सोच से पनपती है, अगर भीड़ के बीच खड़ा होकर कोई बॉडी शमिंग पर स्पीच देने लग जाए या दोस्तों के बीच यह विषय छिड़ जाए तो सब हंसने लगते है क्योंकि उनके अनुसार बॉडी शमिंग इज नॉट ए बिग डील, यह कोई समस्या का विषय नहीं है,  इस शब्द का अर्थ कोई नहीं समझ पाता शिवाय उन लोगों के जो इसका शिकार होते हैं, शरीर पर लगी हुई चोट आसानी से दिख जाती है लेकिन अंदरूनी चोट चाहे जितनी गहरी हो किसी को नजर नहीं आती और बॉडी शमिंग वही अंदरूनी चोट है जो हंसते हुए इंसान की हस्ती, उसका अस्तित्व मिटा देती हैं उसके वजूद को मिटा देती है। मानसिक रूप से उसे इतना कमजोर बना देती है की कुछ भी करने लायक खुद को नही समझता,,,दूसरो के द्वारा उड़ाए गए अपने शरीर के मजाक से हालत होकर लोग खुद से नफरत करने लगते है, उन्हे अपनी जिंदगी बोझ लगने लगती हैं और वो न चाहते हुए भी बोझ बनकर रह जाते हैं,,,
कहने को तो हर कोई कहता है की लोग हमारे बारे मे क्या बोलते हैं क्या सोचते हैं हमे फर्क नहीं पड़ता चाहिए लेकिन वास्तविकता में ऐसा होता नही, सबको फर्क पड़ता है की लोग उसे लेकर कैसी टिप्पणियां करते हैं, उसकी बॉडी में कितने डिफेक्ट निकालते है,

"तन की सुंदरता से ज्यादा मन की सुंदरता जरूरी है" ये लाइन सिर्फ कहने के लिए बनी है, सच यही है की मन से पहले तन की सुंदरता देखी जाती हैं, लड़के हो या लड़किया, पार्टनर चुनते वक्त यह नही देखते की उनका व्यक्तित्व कितना अच्छा है, उनके आंतरिक गुण कैसे है, वो देखते हैं तो सिर्फ उनकी सुंदरता, ताकि किसी से मिलाते वक्त उन्हें झिझक महसूस ना हो,
खैर.......!!!!!!

दो दिन पहले न्यूज में आया था की बॉडी सेमिंग से परेशान होकर एक औरत ने सुसाइड कर लिया, तो वही से ये टॉपिक दिमाग में आया तो गोरी का किरदार लिख दिया,,,,

कैसी लगी बताइएगा, इंतजार रहेगा आपकी प्रतिकियाओ का....... बाकी इस कहानी का मोरल मुझे भी नही पता क्योंकि बॉडी सैमिंग को लोग अपना पर्सनल अधिकार समझते हैं की वो जिसके बारे मे चाहे जैसी टिप्पणियां कर सकते हैं उनकी सोच को रोकने वाला कोई भी नही तो चाहे, सो.....


MaNiShA NeTwAL

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2022

abstract painting

सोमवार, 3 अक्टूबर 2022

हक है हमारा तुम पर

कृष्णा... यार हमें बहुत अजीब लग रहा है पापा जी ने इतनी जल्दी क्यों बुलाया होगा...? 19- 20 वर्षीय लड़की अपनी ही हम उम्र लड़की से बोल रही थी उसके चेहरे पर उदासी की लकीरे साफ दिखाई दे रही थी,,, 
दोनों कॉलेज के बाहर खड़ी बस का इंतजार कर रही थी कृष्णा= यार सूरभी मुझे ना तेरा भविष्य संकट में लग रहा है... 
सुरभि हैरानी से उसकी तरफ देखकर= क्यों..? 
कृष्णा= मुझे लगता है चाचा जी ने फिर तुम्हारे लिए कोई लड़का ढूंढ लिया है,,, 
सुरभि आंखों में नमी लिए बोली= पापा जी क्यों नहीं समझते हमारी बात हम कितनी बार मना कर चुके हैं हमें इतनी जल्दी शादी नहीं करनी अभी कॉलेज खत्म होने में पूरा डेढ़ साल बाकी है और हमें पता है शादी के बाद हमें कोई नहीं पढने देगा... 
कृष्णा उसे चुप कराती हैं "देख सुरभि मैं अभी बोल रही हूं एक बार आवाज उठा अपने लिए बोल दे उन्हे की तुम्हें नहीं करनी है अभी शादी अगर उन्होंने जबरदस्ती शादी कराई तो तू घर छोड़कर चली जाएगी... 
कृष्णा... सुरभि थोड़े गुस्से और रूआसी आवाज में चिल्लाई,,, पापा जी है वो हमारे हक है उनका हमारे ऊपर हम उन्हें तकलीफ नहीं पहुंचा सकते और इसमें गलत ही क्या है वह अपनी बेटी की शादी ही तो कराना चाहते हैं हर मां बाप का सपना होता है कि अपने बच्चों का घर बसते देखें,,,,
कृष्णा सुरभि का हाथ पकड़कर उसकी आंखों से बहते आंसूओ को साफ करते हुए= और बच्चों का क्या.. क्या उन्हें एक बार भी पूछना जरूरी नहीं समझते कि उन्हें क्या चाहिए, सुरभि तुम्हारी ही तरह कोई बच्चा अपने मां-बाप के खिलाफ नहीं जाना चाहता लेकिन क्या हमारी जिंदगी पर केवल दूसरों का ही हक होता है हमारा कोई हक नहीं है... कृष्णा उसका चेहरा पकड़कर= क्या तुम खुश हो...?
सुरभि रोते हुए उसके गले से लिपट जाती है कृष्णा उसके बालों को सहलाते हुए= तू चिंता मत कर मैं अपने पापा से बात करूंगी कि वह चाचा जी को समझाएगै... 
सुरभि= नहीं कृष्णा तुझे हमारी दोस्ती की कसम तू ऐसा कुछ नहीं करेगी पहले ही हमारी शादी को लेकर घर में रोज बहस होती है हम अब तंग आ चुके हैं अब और बहस नहीं चाहिए.. पापा जी का जो फैसला होगा हमें मंजूर है...
लेकिन सुरभि... कृष्णा अपनी बात खत्म कर पाती उससे पहले की बस आ गई और सुरभि चुपचाप बस में चढ़ गई कृष्णा भी उसके पीछे-पीछे बस में आती है बस पूरी तरह भरी हुई थी इसलिए दोनों 10 मिनट के रास्ते खड़ी थी,,,
बस गांव की कच्ची सड़क पर आकर रूकती है कृष्णा और सुरभि किराया देती है और नीचे उतर जाती है कच्ची सड़क से कुछ ही दूरी पर सुरभि का घर था और कृष्णा का दुसरी तरफ दोनों पगडंडियों से होकर अपने अपने घरों की ओर बढ़ जाती है,,, 
सुरभि चौधरी परिवार की बेटी थी घर में कुल मिलाकर 10 लोग रहते थे बुजुर्ग दादा-दादी ताऊजी ताई जी मां पापा भाई भाभी (ताऊ जी का बेटा) सुरभि और एक उसका सगा भाई जो उससे 2 साल छोटा था ताऊजी के 3 लड़कियां थी जिनकी शादी 18 साल की होने से पहले करा दी गई 21 साल की होने से पहले तीनों के बच्चे हो चुके थे और कोई भी 12वीं के आगे नहीं बढ़ पाई थी सुरभि की जिद पर कि वह इतनी जल्दी शादी नहीं करेगी उसे 2 साल का वक्त और दिया गया था पर आसपास और खुद उसके परिवार के तानों से तंग आकर उसके पापा जितनी जल्दी हो सके उसकी शादी कराना चाहते थे सुरभि सेकंड ईयर में थी उसका भाई अभी स्कूल में पढ़ रहा था सुरभि के ताऊ जी का लड़का जो सुरभि से केवल एक ही साल बड़ा था पिछले साल उसकी भी शादी हो चुकी थी और उसकी पत्नी भी शादी के एक महीने बाद ही ससुराल आ गई थी उन्होंने भी कभी कॉलेज का मुंह नहीं देखा था और अब तो वह मां बनने वाली है उम्र सुरभि से भी छोटी है,,,, 
वहीं कृष्णा उसी गांव में अपने छोटे से परिवार के साथ रहती है उसके पिता गांव की सरकारी स्कूल में छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं और मां ग्रहणी है कृष्णा और सौम्या उनकी दो बेटियां और दादी बस इतना सा परिवार है उसका उसके पिता ने कभी उसकी शादी की बात नहीं की क्योंकि कृष्णा खुले विचारों वाली लड़की थी उसे गलत बात का विरोध करना आता था पर उसकी दादी और मा रोज उसके पापा से उसके रिश्ते की बात करते पर वह हर बार कुछ न कुछ कहकर बात टाल देते,,, 

यह गांव है साहब यहां इंसान के रूप में आज भी कई बेजुबान जानवर रहते हैं जहां ने किसी के टूटते सपनों की चीखें सुनाई देती है और ना ही किसी का खुद पर खुद का हक है वह चाहे फिर लड़का हो या लड़की...

सुरभि घर पहुंचती है घर का माहौल देखकर उसे सब कुछ समझ आ गया था वह अंदर आती है हॉल में कुर्सियों पर बड़े ठाठ से उसके दादाजी मुछे ताने बैठे थे और उनके पास उसके ताऊजी और पापा जी, परिवार बेशक मध्यवर्गीय था पर जाटों का ठाठ तो अमीरों की अमीरी को भी रोंधने वाला होता है और उनके सामने तीन और आदमी बैठे थे वहीं बरामदे में सुरभि की दादी ताई जी मां और भाभी उसका ही इंतजार कर रही थी,,, 
सुरभि बेटा आ गई तुम... जा जल्दी से तैयार हो जाओ... उसकी मां ने कहा और उसकी भाभी की तरफ देख कर= लता बहू सुरभि को तैयार कर दे,,,, 
मां... सुरभि के मुंह से धीरे से आवाज निकली,,, 
दादी= छोरी.. बहुत सुन ली है तेरी अब नहीं... जा कर तैयार हो जाओ... 
लता सुरभि के पास आकर बोली= दीदी अब कोई फायदा नहीं है सगाई की पूरी रस्मे हो गई है वह तो जाने वाले थे पर आप आ रही है यह सुनकर रुक गए,, 
सुरभि हैरानी से सबको देखती है फिर लता की तरफ देख कर भाभी= बिना हमसे पूछे सगाई कर दी हमने तो लड़के को देखा भी नहीं यहां तक कि उनकी फोटो भी नहीं देखी और ना ही उन्होंने हमारी... 
यह सब हमारे यहां नहीं होता गुड्डू तेरी बहनों ने भी तो बिना फोटो देखे की शादी की थी ना आज बच्चे खेल रहे हैं उनकी गोद में.... सुरभि की ताई जी बोली,,, 
सुरभि को अब समझ आ गया था कि अब उसके बोलने का कोई फायदा नहीं था वह लता के साथ चली जाती है कुछ देर में सलवार कमीज पहने सिर पर दुपट्टा डाल कर हाथ में चाय की ट्रे लेकर मेहमानों के सामने आती है उसके हाथ काप रहे थे वह खुद को संभालते हुए चाय उन्हें देती है और सबका आशीर्वाद लेती है,,, 
सुरभि के दादा जी= यह है हमारी सुरभि... घर का पूरा काम करती है और साथ में थोड़ी पढ़ाई भी कर लेती हैं,,,
सामने बैठा आदमी जो लड़की का पिता था= चौधरी साहब हमें ज्यादा पढ़ी लिखी बहू नहीं चाहिए बस घर का काम आना चाहिए आप तो जानते ही हैं दिलीप की मां के पैरों में दर्द रहता है बहू आ जाएगी तो उन्हें भी सहारा मिल ही जाएगा और कमाने के लिए दिलीप है ना एक दो महीने में किसी कंपनी में नौकरी लग जाएगा,,, 
उनकी बातें चालू थी सुरभि कुछ देर उनके सामने खड़ी रहती है फिर सामने वाला आदमी उसे नेक के तौर पर कुछ पैसे देता है कुछ देर में वह चले जाते हैं सुरभि के घरवालों उन्हे सुरभि की एक फोटो देते हैं और वह भी लड़के की फोटो सुरभि के घर वालों को दे जाते हैं उनके जाने के बाद और सुरभी अपने पिता के पास आकर बोली= पापा जी आपने हमसे एक बार भी पूछना जरूरी नहीं समझा क्यों...? 
सुरभि के पिता उसके सिर पर हाथ रखकर= क्योंकि हक है हमारा तुम पर बाप है हम तुम्हारे... तुम्हारी जिंदगी का तुम्हारी शादी से पहले हर फैसला लेने का हक रखते हैं हम... 
हमारी पढ़ाई... सुरभि ने सिर झुकाए कहां,,, 
उसके पिता बोले= शादी से पहले हम तुम्हें पढा रहे हैं शादी के बाद तुम पर सिर्फ तुम्हारे पति का हक होगा और वह जो फैसला ले तुम्हें मानना पड़ेगा,,, 
सुरभि अपने कमरे में आती है और चुपचाप बैठ जाती है एक सवाल जो उसके मन में चल रहा था शादी से पहले उस पर माता-पिता का हक था शादी के बाद पति का पर क्या पति का खुद पर हक होगा उस पर भी तो उसके माता-पिता का हक है ना अगर उसका खुद पर हक होता तो वह खुद ही अपनी होने वाली पत्नी को देखने आता ना,,, 
उसके कानों में कृष्णा की बातें गूंज रही थी "क्या हमारी जिंदगी पर केवल दूसरों का ही हक होता है हमारा खुद पर कोई हक नहीं है" 

खैर अब तो शादी होनी ही थी 15 दिन बाद का मुहूर्त था तो सुरभि ने कोलेज जाना छोड़ दिया था पूरा परिवार रिश्तेदारों से भर गया था सब खुश थे पर क्या सुरभि खुश थी यह शायद वही जानती थी,,,, 
कृष्णा सुरभि के घर आती है सुरभि अपने कमरे में बैठी थी कृष्णा उसके पास बैठकर बोली= कर ली ना सबने अपनी मनमानी तू जानती क्या है उस लड़के के बारे में छ साल बड़ा है वह तुमसे... तुमने ना उससे बात की ना उसने तुमसे एक दूसरे की फोटो तक नहीं देखी अगर तू उससे बात करने में भी कंफर्टेबल नहीं है तो कैसे गुजारेगी एक अजनबी के साथ पूरी जिंदगी... सुरभि मैं यह नहीं कह रही की तू शादी मत कर बस इतना कहना चाहता हूं कि अपने पति को इतना हक मत देना कि चाचा जी की तरह वह भी हर बात पर तुम पर अपना हक जताने लगे..,,,
कृष्णा सब इतना आसान नहीं है और अब इन बातों का कोई मतलब ही नहीं है मां ने कसम दी है हमें कि उनके संस्कारों पर अंगुली ना उठने दे पापा जी के सम्मान पर कोई आंच ना आने दे हम दो घरों की लाज है कृष्णा... हमारी एक गलती से दो घरों की बदनामी होगी और पति का शादी के बाद अपनी पत्नी पर पूरा हक बनता है ये मां ने सिखाया है... सुरभि को शायद जिंदगी की हकीकत समझ आ चुकी थी पर कृष्णा अपने विचारों को कैद नहीं कर सकती थी कृष्णा सुरभि के पास घुटनों के बल बैठकर= सात फेरे लेने से और मांग में सिंदूर लगाने से हम किसी को अपनी जिंदगी की कमाल कैसे सोच सकते हैं सुरभि, अगर कोई हम पर गंदी निगाहे डाले या हमें छुए तो हम अपवित्र हो जाते हैं और अगर शादी के बाद पति हम पर हक जताए तो वह पवित्रता है चाहे हम मन से उन्हें अपनाए या नहीं अपनाए... 
कृष्णा... पीछे से एक औरत की आवाज आई सुरभि की मा पीछे ही खड़ी थी,,, हमारी बेटी के कान भरने की कोई जरूरत नहीं है हम से बेहतर हमारी बेटी को कोई नहीं जानता... उन्होंने तेज आवाज में कहा,,, 
कृष्णा उनके पास आकर= क्या जानती है आप अपनी बेटी के बारे में चाची जी.. क्या वह शादी से खुश हैं..? क्या वह अपने होने वाले पति के नाम के अलावा उसके बारे में और कुछ जानती हैं जिस तरह चार महीने पहले बड़े जीजा जी ने दीदी को मारा था वह रोते हुए यहां आई थी और आपने वापस उन्हें उनके पास भेज दिया अगर कल सुरभि के साथ ऐसा ही हुआ तो वैसा ही करेगी आप... खुद को संभालने की उम्र में आपकी बेटी बच्चों को संभालेगी क्या यही चाहती है आप, जिस तरह आपके बोलने से पहले ही चाचा जी गुस्से से डांट कर आप को चुप करा देते हैं और आप कमरे में एक कोने में बैठ कर रोती है क्या आपकी बेटी भी वैसा ही करें यही चाहती है आप चाचीजी... 
सुरभि की मां के पास भी इन बातों का जवाब नहीं था उनके पास क्या शायद किसी भी औरत के पास इन सवालों का जवाब नहीं था,,, 
कृष्णा प्लीज... सुरभि उसके सामने हाथ जोड़कर बोली कृष्णा भी आंखों में नमी लिए वहां से चली जाती है,,,
सारी रस्मों के बाद आज सुरभि की बरात दरवाजे पर खड़ी थी सुरभि की बहने उसकी सहेलियां उसे तैयार करके वरमाला के लिए लाती है कृष्णा सब के पीछे खड़ी थी क्योंकि शायद सुरभी को उससे बेहतर कोई नहीं जानता था दोनों बचपन से साथ पढ़ती आ रही है सुरभि कॉलेज खत्म करके आगे की पढ़ाई करना चाहती थी ताकि ज्यादा नहीं वह एक टीचर बन सके खुद का खर्चा चला सके, छोटी छोटी जरूरतों के लिए उसे किसी के भी सामने हाथ नही फैलाने पड़े, उसके तो सपने भी ज्यादा बड़े नहीं थे लेकिन शायद उन्हें पूरा करने का भी हक उसे नहीं था,,
दिलीप सुरभि का पति दिखने में 26- 27 साल का था दोनों ने माला पहनाते वक्त एक दूसरे पर एक नजर डाली थी फिर फेरो के लिए बैठाया जाता है हर एक फेरे के साथ सुरभि के अरमान जलते जा रहे थे और पिता से हक अब पति का होता जा रहा था मांग में सिंदूर और मंगलसूत्र के पहनते ही एक अजनबी उसका पति परमेश्वर बन गया था जिसे वह जानती भी नहीं थी,,, विदाई की रसम होती है सबकी आंखों में आंसू थे आखिर उनकी वह बेटी जो पराई हो रही थी जिसे पैदा होते ही कह दिया गया था "इस आंगन में बसेरा कर बैठी एक चिड़िया हो एक दिन अपना घोंसला बना ही लोगी" 
मायका सिर्फ एक बसेरा ही तो है जहां वह रहती है तब तक के लिए जब तक उसका घोंसला यानी ससुराल ना बन जाए,, 
सुरभी के माता-पिता की आंखों में दर्द और खुशी के आंसू थे कि उनकी बच्ची जिसे 19 साल पाल पोस कर बड़ा किया वह उनसे दूर जा रही है और खुशी भी की उन्होंने माता-पिता होने का फर्ज निभाया अपनी जिम्मेदारी पूरी की और अपनी बेटी की जिम्मेदारी उसके आगे की हमसफर के हाथों में सौंप दी,, 
सुरभि की आंखे नम थी की उसके पिता ने उसे जिम्मेदारी समझकर पाला और आज अपनी जिम्मेदारी खत्म कर दी एक बार भी उसे नहीं पूछा कि उसे क्या चाहिए और कृष्णा की आंखों में आंसू थे कि क्या एक दिन उसे भी इसी तरह किसी और के हाथों में थोप दिया जाएगा अपनी दोस्त के टूटते अरमान कृष्णा की आंखों से बह रहे थे,,,

सुरभि अपने नए घर में पहुंचती है कुछ रस्म के बाद उसे एक कमरे में ले जाया जाता है कुछ देर में दिलीप कमरे में पहुंचता है 
"बेटा एक पतिव्रता नारी वही कहलाती है जो अपने पति को पूर्ण समर्पित होती है तुम्हें तन मन से अपने पति को खुद को सोफना होगा"
मां दादी ताईजी दीदी भाभी सब ने यही कहा था ना,,,
सुरभि एक नजर दिलीप को देखती है जो उसकी तरफ बढ़ रहा था,, 
"सुरभी तुम्हारे जिस्म पर तो तुम्हारा हक है ना" कृष्णा की आवाज उसके कानों में गूंज रही थी,,,,  
सुरभि इसी कशमकश में थी कि दिलीप उसके पास आकर बैठ जाता है और उसके चेहरे पर हाथ रख देता है सुरभि नजरें झुका लेती है,,, 
दिलीप उसका चेहरा ऊपर करके= सात फेरे लिए हैं आपने हमारे साथ.. हमारे नाम का मंगलसूत्र और सिंदूर है आपकी मांग में पूरे हक़ से आपको छू रहे हैं.. अब पूरा हक है हमारा आप पर.. आप पत्नी जो है हमारी.... 
सुरभि अपनी आंखें बंद कर लेती हैं आज तक सिर्फ उसकी जिंदगी के फैसले लेने का हक उसके पिता का था पर आज से उसके जिस्म पर भी किसी और का हक हो गया था,,, 

दो दिन बाद सुरभि किसी रस्म के लिए अपने मायके आती है उसके पिता उसका पूरा परिवार सब बहुत खुश थे कृष्णा भी अपनी दोस्त के पास आती है वह सुरभी की तरफ देखती है जो अपने परिवार के बीच बैठी थी चेहरे पर एक मामूली सी मुस्कुराहट पर आंखों में एक गलानी थी चेहरे की खुशी शायद उसकी आंखों में नहीं थी,, मां पापा और परिवार को अपनी जिम्मेदारियों के बोझ से मुक्त कर दिया था आज उसने और अब हक अपने पति को सौंप दिया था और जिंदगी के इस कड़वे सच को शायद सुरभि अपना चुकी थी,,,, 
सुरभि कृष्णा के पास आती है जो एक कोने में खड़ी थी सुरभि की आंखों से बेहताशा आंसू गिरने लगते हैं वह कृष्णा से लिपट जाती है कृष्णा भी उसे बाहों में भर लेती है,,, 
हमने सौंप दिया खुद को उन्हें कृष्णा.. दे दिया पूरा हक नहीं रोक पाए उन्हें.. नहीं कह सके कि हम सम्मान नहीं जीता जागता इंसान हैं जिस पर सब अपना हक जताये... अब हम अपने सपने अपनी खुशियां सब कुछ अपने पति के नाम कर देंगे हमें इस रिश्ते की हकीकत को मानना होगा हमारे पापा जी मां दादा-दादी सब खुश है हमें भी यह नया रिश्ता निभाकर इनका कर्ज चुकाना है...सुरभि अपने आंसुओं के जरिए अपने दर्द को बाहर निकाल रही थी,,,  
बस कर सुरभि.. मैं कुछ नहीं कहूंगी.. नहीं कहूंगी तुम्हें कि क्यों उन्हें हक दिया क्योंकि इस जिंदगी की हकीकत अब मुझे भी समझ आ गई है समझ आ गया है कि हमारी मां का हम पर हक है क्योंकि 9 महीने उन्होंने हमें अपनी कोख में रखा अपना दूध पिलाया हमें खड़ा होना सिखाया... पापा ने हमें पाल पोस कर बड़ा किया हमारी हर जरूरत पूरी की, परिवार ने हमें इस समाज में खड़ा होने के लिए अपना नाम दिया, भाई हमारी रक्षा करता है पति जिंदगी भर हमारे दर्द में हमारी खुशियों में हमारे साथ रहेगा और उसके बाद हमारे बच्चों का हक जो बुढ़ापे में हमे सहारा देंगे इन सब का हक है हमारे ऊपर चाहे वह कैसे भी हो हमें यह स्वीकार करना ही होगा.. लेकिन जिंदगी भर एक सवाल जो हमारे मन में रहेगा कि क्यों हमारा खुद पर हक नहीं है..? क्यों किसी के सहारे के बिना हम जिंदगी की नौका पार नहीं कर सकते.. क्यों हमें भी उसी तरह आजाद नहीं किया जाता जैसे पंछी अपने बच्चों के पंख निकलते ही उन्हें खुले आसमान में अकेले उड़ने को छोड़ देते हैं काश हमारे मां-बाप भी हमें थोड़ा मजबूत बनाते और कह देते कि तुम्हारी जिंदगी का हक अब तुम्हारे ऊपर है जो तुम चाहो वह करो अगर ऐसा होता तो ना हम उनके लिए बोझ बनते ना उनकी जिम्मेदारी और ना हमें उनसे कोई शिकायत होती..... 
सुरभि और कृष्णा का परिवार जो उनके पास खड़ा यह बातें सुन रहा था उनकी आंखों में भी आंसू थे क्योंकि बच्चों के मन में उनके फैसलों को लेकर कितना दर्द रहता है यह सुरभि और कृष्णा की बातों से उन्हें समझ आ गया था पर किसी के पास कहने को कुछ नहीं था और कहते भी तो क्या वही जो कहते आए हैं हक है हमारा तुम पर.....

Note: इस कहानी के जरिए मै किसी भी रिश्ते का अपमान नहीं कर रही बस एक हकीकत आपके सामने रखना चाहती हूं जो मैने अपने आस पास देखी है,, शायद वर्तमान समय में यही कारण है रिश्तों के बीच कड़वाहट का,, कभी हम अपनों को नहीं समझ पाते तो कभी अपने हमें नहीं समझ पाते,,,, 

मनीषा नेटवाल

गुरुवार, 29 सितंबर 2022

गरीबी एक इम्तेहान

पंकज आज लास्ट वार्निंग है अगर दो दिन में स्कूल फीस जमा नहीं हुई तो मैं तुम्हें स्कूल से निकाल दूंगा... प्रिंसिपल कक्ष से प्रिंसिपल की कड़कती आवाज सामने खड़े बारहवीं कक्षा के पंकज के कानों में गूंजी,,,,
सर.. सर आपको पता है ना मेरे घर की हालत इस वक्त बिल्कुल ठीक नहीं है मैं धीरे-धीरे करके फीस दे दूंगा,,,, पंकज ने डरते हुए प्रिंसिपल के सामने अपनी बात रखी,,,
इस वक्त प्रिंसिपल का गुस्सा सातवें आसमान पर था और पंकज की किसी बात का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था वह गुस्से में बोले-  10 दिन बाद बोर्ड एग्जाम शुरू होने वाली है दो साल में तुमसे एक पैसा जमा नहीं करवाया गया, तो मैं कैसे उम्मीद करूं तुमसे कि तुम बाद में फीस जमा करवा दोगे,,,,,,
पंकज कुछ नहीं बोला वह सिर झुकाए खड़ा था,,,,
प्रिंसिपल इस बार थोड़े शांत लहजे में बोले- देखो पंकज तुम क्लास के होनहार बच्चे हो, हमें तुमसे बहुत उम्मीद है लेकिन बिना फीस जमा करवाएं हम तुम्हें परीक्षा में नहीं बैठने दे सकते तुम्हारी तरह और भी गरीब स्टूडेंट पढ़ते हैं हमारी स्कूल में, अगर सबको फ्री पढ़ाने लग गए तो हम टीचर्स को क्या देंगे हमें भी पैसों की जरूरत पड़ती है हमें भी पता है तुम्हारे पापा स्कूल फीस जमा नहीं करवा सकते इसलिए 2 साल मैं तुमसे एक पैसा नहीं मांगा लेकिन अब तुम्हें पैसे जमा करवाने होंगे वरना मजबूरन हमें तुम्हें स्कूल से निकालना पड़ेगा.. अब तुम जा सकते हो,,,,,
पंकज बिना कुछ बोले कक्ष से बाहर आ गया स्कूल की छुट्टी होते ही वह अपनी पुरानी साइकिल से 7 किलोमीटर दूर स्तिथ अपने घर की ओर रवाना हो गया,,,
पंकज के दिमाग में रह रहकर प्रिंसिपल की बातें घूम रही थी वह अपने घर से कुछ दूर स्थित खेत में आकर बैठ गया उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह फीस की बात अपने घर पर कैसे करें, उसे कल रात की याद आती है जब उसने अपने बुड्ढे मां बापा की बातें छुपकर सुनी थी,,,,
पंकज पांच बहनों के बाद सबसे छोटा भाई है बहनों की शादी हो गई थी गरीब माता-पिता ने वर्षों से बचाए सारे पैसे और पूर्वजों से मिली जमीन को बेचकर अपनी बेटियों की शादी में लगा दिया, लाखों का कर्जा अभी भी सिर पर था बड़ी मुश्किल से दो वक्त का खाना गरीब बाप अपने खेतों में काम करके कमा लेता था,,, कल रात को घर में आटा नहीं था दिलीप जी (पंकज के पिता) अपने कच्चे घर में किसी गहरी सोच में बैठे थे उनकी पत्नी उनके पास आकर बोली- सुनिए जी, घर में आटा नहीं है पड़ोसियों ने भी मना कर दिया, कहते हैं हम उधार लेकर वापस नहीं देते,,,
दिलीप जी हल्का सा मुस्कुराते हुए बोले- तो इसमें गलत क्या कहते हैं 5 दिन का नाम लेकर हम वापस 10 दिन में देते हैं तो लोग तो कहेंगे ही,आप चिंता मत कीजिए मैं अभी दुकान से राशन लेकर आता हूं.....
इतनी रात को कौन आपको राशन देगा, सुबह की दो रोटी ठंडी पड़ी है आप और पंकज खा लेना मुझे भूख नहीं है,,,, पंकज की मां अपनी भूख का गला घोटते हुए बोली,,,,,
मुझे भी भूख नहीं है, दिलीप जी ने कहा और अपनी चारपाई उठाकर बाहर ले गए,,,,
यह सब बातें पंकज बाहर खड़ा सुन रहा था,,,
पंकज को कभी प्रिंसिपल की बात याद आती तो कभी अपने माता-पिता की,, उसकी आंखों से आंसू की बूंदे झलक रही थी,,,,
10वीं कक्षा में गांव की सरकारी स्कूल में पढ़कर पंकज ने 86% बनाए थे शुरू से ही पढ़ाई में लगाव था वह आगे पढ़ना चाहता था पर सरकारी स्कूल केवल दसवीं तक ही थी,,, ग्यारहवीं का नया सेशन शुरू होने से पहले प्राइवेट स्कूल के टीचर्स  छात्रों के एडमिशन के लिए आए हुए थे किसी ने उन्हें पंकज के बारे में बताया तो टीचर्स पंकज के घर आ गए, स्कूल की फीस काफी ज्यादा थी इसलिए खुद पंकज ने ही मना कर दिया था, टीचर ने बिना फीस पढ़ाने को कहा तो पंकज और उसका परिवार भी मान गए,,, पर अब स्कूल वाले उससे आधी फीस मांग रहे थे,,,,,
पंकज अपने अतीत में खोया हुआ था तभी उसकी नजर दिलीप जी पर गई जो उसी की तरफ आ रहे थे,,,, पंकज अपनी साइकल लेकर उनके पास ही आ गया,,,
दिलीप जी-  पंकज तू यहां क्या कर रहा है छुट्टी हुए तो कितना टाइम हो गया.....
कुछ नहीं पापा, बस खेत देखने आ गया आप कहीं जा रहे हो क्या...? पंकज ने पूछा,,,,
दिलीप जी-  हां गांव से कुछ सामान लाना था,,,
पंकज-  मैं आपको साइकिल से लेकर चलता हूं आइए,,,,
पंकज के जिद करने पर दिलीप जी साइकिल पर बैठ गए,, कुछ दूर एक बड़ी सी दुकान के पास आकर पंकज ने साइकिल रोकी,
दिलीप जी - तू यही रहना मैं अभी आया,,,,
कहकर वो अंदर चले जाते हैं पंकज भी दुकान के बाहर खड़ा हो गया। 
अंदर एक आदमी कुर्सी पर पैर फैलाकर बैठा था दिलीप जी को सामने देखकर वह बोला-  दिलीप जी आज फिर पैसों की जरूरत पड़ गई आपको,,,, 
दिलिप जी - सेठ जी सिर्फ ₹2000 चाहिए कुछ दिनों में वापस लौटा दूंगा,,,
वह आदमी हंसते हुए - अभी 5 साल पहले का उधार चल रहा हैं और आप कुछ दिनों की बात कर रहे हैं,,,
दिलीप जी ने अपना सिर झुका लिया है
वह आदमी अपनी जेब से ₹2000 निकाल कर दिलीप जी को थमाते हुए बोले-  अपने बेटे से कहिए कुछ काम करें, घर में खाने के लाले पड़े हुए हैं और वह गांव की महंगी स्कूल में पढ़ रहा है,,,,
दिलीप जी ने कोई जवाब नहीं दिया वह बाहर आ गए,,
यह बातें पंकज ने भी सुन ली थी दिलीप जी के चेहरे पर कोई भाव नहीं थे पर पंकज के सीने में एक आग सी जल चुकी थी उसने रास्ते में दिलीप जी से कहा - पापा आपने उसे कुछ कहा क्यों नहीं,,,
बेटा इस समाज में जवाब देने का अधिकार केवल उसी को है जिसकी हैसियत हो, मांगने वाला केवल सिर झुकाना जानता है जवाब देना नहीं,,, दिलीप जी अपने वर्षों के तजुर्बे  से बोले,,,
पंकज ने घर पर फीस की बात नहीं की 2 दिन बाद प्रिंसिपल ने पंकज को सुबह स्कूल जाते ही वापस घर भेज दिया इतनी जल्दी पंकज को घर आते देख उसकी मां ने पूछा-  तू इतनी जल्दी घर क्यों आ गया,,,,
पंकज अपना दर्द और आसू छुपाते हुए - कुछ दिनों बाद परीक्षा है तो घर में ही पढ़ना है मां,,,
पंकज कहकर वहां से अपनी झोपड़ी में बैठकर पढ़ने लगा,,,
दो-तीन दिन और बीत गए थे पंकज की टीसी स्कूल वालों ने नहीं दी थी इसलिए वह घर पर ही पढ़ाई करने लगा,,
दो तिन दिन बाद पंकज के स्कूल के दोस्त ने दिलीप जी को स्कूल प्रिंसिपल के द्वारा पंकज को स्कूल से निकाले जाने की बात बताई ,,,,,,
शाम को दिलीप जी उनकी पत्नी और पंकज खाना खा रहे थे तो दिलीप जी ने पंकज की तरफ देख कर पूछा -  स्कूल वाले कितनी फीस मांग रहे हैं,,,
पंकज हैरानी से देखने लगा तो वह बोले-  तुम्हारे दोस्त ने सब कुछ बता दिया है 
पंकज - ₹15000 मांग रहे हैं....
दिलीप जी पेटी में से ₹15000 पंकज को लाकर देते हुए बोले-  मैंने 50000 में अपनी जमीन का कुछ हिस्सा और बेच दिया है यह पैसे अपने मास्टर जी को दे देना और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें अभी तेरा बाप जिंदा है,,,,,
पंकज ने पैसे स्कूल में जमा करवा दिए थे तो स्कूल वालों ने भी उसे वापस रख लिया कुछ दिनों में 12वीं की परीक्षा शुरू हो गई पंकज साइंस में था उसके सारे पेपर अच्छे हो रहे थे पंकज के परिवार और स्कूल वालों की उम्मीदें पंकज के रिजल्ट पर थीं 93 परसेंट के साथ पंकज स्कूल का टॉपर रहा सब खुश थे पंकज भी,,,,
अब समस्या थी आगे की पढ़ाई की,  टीचर्स के कहने पर पंकज ने शहर की अच्छी कॉलेज में फॉर्म भरा दिया,अच्छे अंक होने के कारण पंकज को वह कॉलेज भी मिल गई और स्कॉलरशिप से उसके रहने का खर्चा भी चल रहा था,,, पर उसके घर की हालत आज भी वैसी ही थी जॉब के लिए 4 साल तक वह इंतजार नहीं कर सकता था इसलिए उसने आसपास पार्ट टाइम जॉब करने की सोची,,, एक दिन पंकज कॉलेज से अपने कमरे पर आ रहा था रास्ते में उसे उसका पुराना स्कूल दोस्त मिल गया, पंकज उसे अपने साथ ले आया कुछ देर बात करके पंकज ने अपने दोस्त को अपनी समस्या बताई,,
पंकज-  अरुण में पार्ट टाइम जॉब करना चाहता हूं यार.. तुम्हें तो पता है ना घर की कंडीशन कैसी है,,,
अरुण-  लेकिन तू करेगा क्या,,
पंकज- मैं कुछ भी करने को तैयार हूं तुम्हारी नजर में ऐसी कोई कंपनी जो तीन चार घंटों के लिए मुझे जॉब दे सके,,,
अरुण कुछ सोच कर बोला-  हां कल तू मेरे साथ चलना मेरे पास का एक लड़का भी वहां काम करता है सुबह 8:00 मेरे घर आ जाना हम वहां से ही चलेंगे,,,,
पंकज को भी अरुण की बात अच्छी लगी तो वह भी सुबह तैयार होकर उनके घर पहुंच गया और दोनों वहां से उस कंपनी में चले गए,,,
पंकज कंपनी के मैनेजर के पास आकर अपनी समस्या बताता है,,,
मैनेजर - ठिक है लेकिन पहले तुम्हें दो लाख रुपए जमा करवाने पड़ेंगे चार महीनों के लिए,, उसके बाद तुम्हारी सैलरी स्टार्ट होगी हम महीने में तुम्हें ₹25000 देंगे और काम में तुम्हें हमारे प्रोडक्ट्स को घर-घर पहुंचाना होगा,,,,
इस वक्त पच्चीस हजार की सैलरी पंकज के लिए काफी थी लेकिन दो लाख का इंतजाम कैसे करेगा, वही सोच रहा था ,,,,
मैनेजर - देखो 3 घंटे के लिए कोई इतनी सैलरी नहीं देगा इसलिए सोच लो और एक साथ हम दो लाख नहीं मांग रहे तुम तीन महीनों तक किस्तों में दे सकते हो ,,,
पंकज ने तो 3 दिन का वक्त मांगा और इस बारे में घर पर बात की, पंकज खुद के पैरों पर खड़ा हो जाए इसलिए उसकी बहनों ने मिलकर दो लाख रुपए का इंतजाम कर दिया,,,
पंकज कालेज की छुट्टी होते ही कंपनी से मिले सामान को बेचने निकल जाता था,,, धीरे-धीरे उसे कंपनी से ज्यादा काम मिलने लगा जिस कारण वह कॉलेज की पढ़ाई को टाइम नहीं दे पाता था इसलिए कालेज के पहले ही सेमेस्टर में तीन सब्जेक्ट में फेल हो गया,,, शुरुआत में सबसे आगे रहने वाले पंकज का इतनी सब्जेक्ट में फेल होना उसकी पहली और सबसे बड़ी असफलता थी,,, यह बात उसने किसी को नहीं बताई वह वापस अपने काम में लग गया 4 महीने से ज्यादा हो गए थे और दो लाख रुपए उसने कंपनी को दे दिए थे फिर भी उसे कंपनी की ओर से एक पैसा नहीं मिला वह मैनेजर से बात करता तो वह आगे का टाइम देकर उसे भेज देता,,
छह-सात महीने बीत गए पंकज उस कंपनी से हट भी नहीं सकता था क्योंकि उसने पहले रुपए जमा करवा दिए थे घर पर सब उधार मांगने लग गए थे वह पंकज से पूछते तो पंकज कोई ना कोई बहाना बनाकर उनकी बात टाल देता,,
एक दिन उसे पता चला कि जिस कंपनी में वह काम करता है वह कंपनी फ्रॉड है और उसके मैनेजर को पकड़ लिया गया है यह सुनते ही जैसे पंकज की पूरी दुनिया उजड़ गई हो, घर वालों को क्या कहेगा इतने पैसे कैसे जमा करवाएंगा और जो स्कॉलरशिप मिलती थी फेल होने के कारण वह भी रुक गई थी,,,,
इस घटना के बाद पंकज पूरी तरीके से डिप्रेशन में चला गया था उसने बिना घर वालों को इस बारे में बताएं कॉलेज छोड़ दिया और जहां रहता था वह जगह भी छोड़ दी,,,,
एक दो महीने तक पंकज से बात नहीं हुई तो उसके मां-बाप घबरा गए वह उसके जीजा के साथ उसकी कॉलेज पहुंचे वहां से पता चला है कि वह दो महीने से कॉलेज नहीं आ रहा,,, तो वह उस दोस्त के साथ उस कंपनी में पहुंचे जहां पंकज काम करता था लेकिन वहां मालूम चला कि कंपनी फ्रॉड थी,,,,, घरवाले को सब कुछ समझ आ गया था,,,
उसके मां-बाप और बहनों की हालत खराब हो गई थी परिवार पंकज के लिए परेशान था और जिन लोगों ने पंकज को पैसे दे रखे थे उन्होने घर पर हल्ला बोल दिया था क्योंकि उनकी उम्मीद पंकज से थीं लेकिन अब वह नहीं है तो सब दिलीप जी को परेशान करने लगे,,,,,

उसी शहर की एक छोटी सी गली में एक टूटे फूटे कमरे में पंकज 2 महीने से रह रहा था डिप्रेशन ने उसे इस तरह जकड़ लिया था कि वह चाहकर भी उससे बाहर नहीं निकल पा रहा था,,, जब सारे दरवाजे बंद हो जाते हैं तो इंसान के पास एक ही रास्ता बचता है खुद ही अपनी जिंदगी खत्म करने का,, "सुसाइड"  पंकज की सोचने समझने की क्षमता खत्म हो चुकी थी उसने घर वाले सब के बारे में सोचना बंद कर दिया था वह आखिरी बार कमरे से बाहर निकलकर खुली सांस लेना चाहता था वह पागलों की तरह सड़क पर घूम रहा था बहुत से साधन उसके सामने से गुजर रहे थे पर मौत इतनी आसान नहीं थी उसके लिए,,, पंकज आगे बढ़ ही रहा था की रोड की एक तरफ उसकी नजर जाती है जहां एक वृद्ध जोड़ा बैठा था वे खाने के लिए लोगों के सामने झोली फैला कर बैठे थे पर वहां से जाने वालो की किसी की भी नजर उन पर नहीं पड़ती,,, पंकज को वहा बैठे उन पति-पत्नी की जगह अपने मां-बाप दिखाई दे रहे थे वह धीरे-धीरे कदमों से उनकी तरफ बढ़ गया,,
बुड्ढी औरत अपने पति से बोल रही थी - आज अगर हमार लल्ला जिंदा होता तो हमको ई नोबत नाहीं आती काहे ईश्वर ने मोई कोख उजाड़ दी.. काहे...
वह आदमी अपनी रोती हुई पत्नी को शांत कराते हुए बोला- भाग्यवान काहे रो रही हों, हमार किस्मत मां कोनो संतान सुख लिख्योडा हि ना है, ईश्वर भी जानत हैं कि गरीब को धन केवल उको बेटो होव है,,,
वह पति-पत्नी एक दूसरे का हाथ पकड़कर वहां से चले गए उनकी यह बातें पंकज सुन रहा था उसकी आंखों के सामने अपने मां-बाप के साथ बिताये वक्त की यादें थीं वह आंखों में आंसू लिए वही बैठ जाता है फिर उसकी नजर एक 8-9 साल के बच्चे पर जाती हैं जिसका एक हाथ टूटा हुआ था दूसरे हाथ में फूल थे जो वहां से गुजरने वाले लोगों को दे रहा था एक आदमी उसे 50 का नोट थमाता है बदले में वह उससे चार फूल लेकर जाता है,,,,वह छोटा बच्चा उन ₹50 को देखकर काफी खुश था तभी एक आदमी जिसके हाथ में शराब की बोतल थी वह उस बच्चे से वह 50 का नोट छीन कर भाग जाता है वह बच्चा उसके पीछे दौड़ता है पर वह आदमी उसकी पहुंच से काफी दूर था वह बच्चा वापस अपनी जगह आकर फूलों को बेचने लगता है कुछ ही देर में उसके सारे फुल बिक जाते हैं और वह उन फूलों के बदले मिले पैसों को देखकर काफी खुश होता है और वहां से चला जाता है,,,,

पंकज के सामने घटी इन दो घटनाओं ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया था उसके सामने कभी अपने बूढ़े मां बाप और बहनों का चेहरा था तो कभी उसकी गरीब जिंदगी....
क्या सोच रहे हो... एक आवाज उसके कानों में गूंजी, पंकज ने चारो तरफ नज़र फैलाई तो उसे अपने सामने एक परछाई दिखाई थी जो बिल्कुल उसी की तरह दिखाई दे रही थी,,,
पंकज - कौन हो तुम...
तुम्हारा वह हिस्सा जो हर बार तुम्हें गलत करने से रोकता है, जिसने तुम्हें हमेशा जीतना सिखाया मैं तुम्हारे अंदर कि वह अच्छाई और जीत हूं जो हर बुरे वक्त से तुम्हें बचाती हूं,,,,
पंकज रोते हुए - क्या करूं मैं, आज तक केवल धोखा मिला है लोग मजाक बनाते हैं मेरी गरीबी का.. नहीं जी सकता मैं इस संसार में जहां गरीबों को लोग अपने पैर की जूती समझते हैं,,,,
वह परछाई मुस्कुराते हुए बोली- तो तुम इसलिए मरना चाहते हो, अभी तुमने उस वृद्ध जोड़े को देखा जिसने अपना बेटा खो दिया, वह पैसे के लिए नहीं रो रहा था वह अपने बेटे के लिए रो रहा है.... अगर तुम मर गए तो सोचा है तुम्हारे मां-बाप का क्या होगा, इतना कर्जा अपने सिर पर लेकर मरोगे तो तुम्हारी मौत पर लोग सिर्फ गालियां देंगे,,,, उस छोटे बच्चे को देखा जिसका एक हाथ नहीं है फिर भी उसने हार नहीं मानी तुम्हारी ही तरह एक आदमी ने उससे पैसे छीन लिए लेकिन वह फिर अपने काम में लग गया और तू इतनी जल्दी हार मान गया, एक बार उस बाप के बारे में सोच जो 60 सालों से गरीबी में रहकर तुम्हारा पेट पालता आ रहा है और जब तुम्हारी बारी आई तो तुम मरने जा रहे हो,,,
पंकज को खुद पर ही शर्मिंदगी महसूस हो रही थी वह अपनी गलती पर ही रो रहा था,,,,
अब भी कुछ नहीं बिगड़ा, एक नई शुरुआत करो.. अपने अंदर की काबिलियत को तलाशो... शायद एक दिन तुम्हे इस गरीबी में भी स्वर्ग मिल जाए,,,,, उस परछाई की आवाज आई,,,,,,
पंकज ने उसकी ओर देखा तब तक वह परछाई गायब हो चुकी थी,,, अब पंकज को समझ आ गया था कि उसे क्या करना है अगले दिन पंकज अपने घर पहुंचा, उसके मां-बाप जमीन के बचे एक छोटे से हिस्से में काम कर रहे थे पंकज उनके पास पहुंचा दोनों की नजर पंकज पर गई तो दोनों पंकज को देखकर रोने लग गए,,, पंकज जाकर दोनों के गले से लिपट गया उसने अपनी तकलीफ दोनो को बताई,,,,,
दिलीप जी - मुझे उम्मीद थी तू लौट कर वापस जरूर आएगा... भूल जाओ उन बातों को और एक नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरु कर, एक बात याद रखना बेटा गरीब होना पाप नहीं एक इम्तिहान है जिसमें पास होने की हिम्मत केवल हम जैसे लोगों में ही होती हैं,,,
पंकज ने अपने मां-बाप को आश्वासन दिया कि वह कभी ऐसी गलती नहीं करेगा,,, पंकज ने एक साल अपनी पढ़ाई छोड़ दी और शहर की छोटी मोटी कोचिंगो में बच्चों को पढ़ाने लग गया,, धीरे-धीरे कोचिंग से स्कूलों में,,, पंकज पढ़ाई में पहले से ही होशियार था और एक सबक जो उसे जिंदगी से मिल गया था उसे नए रास्तों की ओर ले जा रहा था,,,,,
दो साल की कड़ी मेहनत से कमाए पेसो से उसने सारा उधार चुका दिया था,, उसने फिर से कॉलेज ज्वाइन की और खुद की पढ़ाई के साथ अपना एक छोटा सा कोचिंग सेंटर खोल लिया,,, कॉलेज खत्म होते ही एक साल बाद उसे सरकारी नौकरी मिल गई और उसकी कोचिंग ने उस गांव के गरीब बच्चों की फ्री में शिक्षा दी और उन लोगो को रोजगार जो अपनी गरीबी से गुजर रहे थे,,, पंकज ने उसी गांव में अपना पक्का मकान बना लिया था उसके मां-बाप आज भी खुशी से अपने खेत में काम करते थे और वक्त मिलने पर पंकज भी अपने खेत में आकर बैठ जाता था,,,,
6 साल का वक्त लगा था पर पंकज आज उस जगह पर था जहां आने की शायद उसने अपनी गरीबी के कारण सोची भी नहीं थी,,,
एक दिन वह अपने खेत में बैठा था उसे एक बात याद आती है जो उस परछाई ने कही थी,, तुम्हें एक दिन गरीबी में भी स्वर्ग दिखेगा,,,,,
पंकज मुस्कराते हुए ऊपर आसमान की तरफ देखकर बोला- किसने कहा कि भगवान नही है गलत है वह लोग जो यह कहते हैं,,, भगवान को मैंने अपनी आंखों से देखा है उस गरीब  वृद्ध जोड़े में, उस छोटे बच्चे में और मेरे अंदर की उस परछाई के रूप में भगवान ही था,, जिसने मुझे रास्ता दिखाया,,,, गरीब होना पाप नहीं इम्तिहान है जो मैंने पास कर लिया हैं,,, थैंक यू भगवान.....

Manisha Netwal


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बुधवार, 28 सितंबर 2022

ड्रीमर

सुबह के सात बज रहे थे घर के सारे लोग अपने अपने काम में व्यस्त थे सिवाय एक को छोड़कर...... बड़े से घर के एक छोटे कमरे में खिड़की से धूप पुरे कमरे में आ रही थी पर उस धूप का महर पर कोई असर नहीं था वह आराम से सोई हुई थी क्योंकि उसका स्पेशल अलार्म अभी बजना बाकी था.....
महर की दादी बाहर से ही रोज की तरह बड़बड़ाते हुए कमरे में आ रही थी - घर के छोटे छोटे बच्चे तक सुबह पांच बजे उठ जाते है लेकिन ये लड़की... धूप सिर पर है मगर उठने का नाम नहीं.....
फिर महर की कंबल साइड में करके - महर उठ जा बेटा.. तूझे उठाते उठाते मैं हार चुकी हूं...
प्लीज़ दादी... थोड़ी देर और आप बाहर चलिए मैं आ रही हूं... महर वापस कम्बल ओढ़ते हुए बोली,,,,,
दादी बिना कुछ बोले वापस बाहर आ गईं थीं क्योंकि उन्हे मालूम था हर रोज़ की तरफ ये उनके कहने पर तो उठने वाली है नहीं......
पहले अलार्म के पांच मिनिट बाद दुसरा अलार्म महर के छोटे भाई बहनों का... जिनसे महर को कोइ फ़र्क नहीं पड़ता था बल्कि वापस उन्हें ही डाटकर भेज देती थीं,,,,
तीसरा अलार्म थोडा हार्मफुल होता था जिसके बाद महर को सीधा उठकर बाहर का रास्ता ही पकड़ना पड़ता था, मम्मी की सुबह सुबह की महागाथा चालु हों चुकी थीं कमरे मे आते ही महर के कम्बल को थोडा गुस्से से साइड में फेंककर - इस कुंभकर्ण को मेरे ही घर में पैदा होना था क्या.. रोज एक घंटा इसको उठाने में चला जाता हैं। इतनी बडी हो गई है काम के एक लक्खण नहीं है.. ऐसे नहीं की अपनी मां का सुबह सुबह काम में हाथ बताये....
फिर हर मदर इंडिया की तरह फेवरेट डायलॉग - शादी के बाद पता नहीं क्या होगा इसका....
महर, उठकर बाहर जाते हुए बोली - एक काम करना मम्मी, शादी के बाद आप चली जाना मेरी जगह... आप तो चार बजे उठ जाती हों ना... फिर तो कोई प्रॉब्लम ही नहीं होगी....
महर बाहर आ गई थी मम्मी उसके पिछे आते हुए बोली - अठारह की हो गई है तु... तेरी उम्र में मैं शादी करके यहां आ गई थी,,,,,,,
कुछ देर में महर तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल जाती है,,,,, मेहर जैसे ही कॉलेज के गेट पर पहुंचती है उसकी दोस्त अनाया दौड़ते हुए उसके पास आती है,,,
मेहर, उसे देखकर- क्या हुआ... कॉलेज कहीं भागे थोड़ी जा रहा है जो तू एक्सप्रेस बनकर आ रही है....
अनाया, खुशी से उछलते हुए- यू नो महर... इस बार वेकेशन पर पापा हमे शिमला लेकर जा रहे हैं मेरा बचपन से ड्रीम था कि मैं अपने परिवार के साथ शिमला की ट्रिप पर जाऊं,,,,
मेहर, अनाया के साथ आगे बढ़ते हुए - बढ़िया है यार तेरा ड्रीम पूरा हो रहा है... शिमला तो हर लड़की की फेवरेट  जगह होता है... कब जा रही है...
अनाया - तीन दिन बाद... अपनी बेच की सारी गर्ल्स कहीं ना कहीं जा रही है तेरा क्या प्लान है,,,,
मेहर, मुस्कुराते हुए-  दो दिन बाद दीदी की इंगेजमेंट हैं फिलहाल तो उसकी तैयारी करनी है और आगे का कोई प्लान नहीं है....
अनाया-  मेहर तू तो इस साल से ट्रैकिंग स्टार्ट करना चाहती थी ना... ट्रैकिंग तेरा कितना बड़ा सपना है और इस बार तो तेरी एज भी हो गई... तूने उसके बारे में कुछ नहीं सोचा...
मेहर-  ट्रेकिंग मेरा सपना नहीं मेरी जान है, यह मेरे घर वालों से लेकर स्कूल फ्रेंड्स और तुम सब को भी पता है.. बस एक बार गोल्डन अपॉर्चुनिटी(मौका) मिल जाए फिर देखना मेहर और उसके सपने कैसे बड़े-बड़े रास्ते पार करते हैं....
दोनों बातें करते हुए क्लास में पहुंचती है आज फर्स्ट ईयर की लास्ट क्लास थी एग्जाम्स  खत्म हो चुके थे तो सारे स्टूडेंट्स छुट्टियों में घूमने जाने की प्लानिंग बना रहे थे,,,

मेहर कॉलेज से घर पहुंचती है जहां दो दिन बाद होने वाले फंक्शन की तैयारियां चल रही थी,, शाम को मेहर के सारे कजंस एक साथ बैठे बातें कर रहे थे,,,
संजना दी (मेहर की कजन सिस्टर) आप इतनी जल्दी शादी के लिए तैयार हो गए.. अभी आपका m.tech. कंप्लीट होने में पूरा 1 साल बाकी है और 6 महीने बाद शादी है... महर ने संजना की तरफ देख कर कहा,,,
संजना - तो इसमें क्या है पढ़ाई तो शादी के बाद भी कंप्लीट हो सकती है ना.. अब हर बात के लिए घरवालों से argue ( बहस) करना भी अच्छा नहीं है वह हमारे लिए जो फैसला लेते हैं कुछ सोच समझकर ही लेते हैं इसलिए मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है,,,,
विवेक (संजना का छोटा भाई) मेहर को चीढ़ाते हुए-  महर दो साल बाद तेरा भी नंबर आने वाला है देखना तु भी कुछ नहीं बोल पाएगी....
महर अपने ही सपनों की दुनिया में खोई हुई थी वह विवेक की तरफ देखकर बोली - नहीं भाई... इतनी जल्दी में शादी नहीं करना चाहती, मैं पहले अपने ड्रीम्स पुरे करना चाहती हूं.. किसी की मिसेज बनने से पहले मैं खुद की पहचान बनाना चाहती हूं, मैं कुछ करना चाहती हूं भाई कुछ ऐसा जिससे लोग मुझे किसी और के नाम से नहीं, मेरे खुद के नाम से जाने.. एक अलग पहचान हो मेरी, पहले मैं खुलकर अपने सपनों को जीना चाहती हूं....,,,
संजना -  महर सपनों की दुनिया केवल कहानियों में अच्छी लगती है असल जिंदगी में हमारे देखे हुए हर सपने पूरे नहीं होते.... 
महर, मुस्कुराते हुए - दी.. हर लिखी हुई कहानियां काल्पनिक नहीं होती, कुछ कहानियां असल जिंदगी से पन्नों पर उतारी जाती है, जब हम कुछ करने के सपने देखते हैं ना तो हमारे अंदर एक अलग सा जुनून होता है सपने को पूरा करने का जिद्दिपन होता है.. जो सपनो के लिए हर हद पार कर देता है वहीं सच्चा ड्रीमर (सपने देखने वाला) होता है।
कृष्णा (मेहर की कजन)- हां समझ गए तुम्हें और तुम्हारी सपनों की दुनिया को.....तू बता तुमने बात की चाचाजी से कि तुम ट्रेकिंग करना चाहती हों....
मेहर - नहीं... पर पापा मुझे समझते हैं उन्हें पता है कि मेरा ड्रीम क्या है.. देखना एक बार मौका मिल गया तो पापा बिना कुछ कहे हा बोल देंगे.....
कुछ देर में सब अपने अपने कमरे में चले जाते हैं महर वही बैठी कुछ सोच रही थी।
महर जॉइंट फैमिली में रहती थी और जॉइंट फैमिली में छोटी से छोटी खुशियां भी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है,, तो संजना की सगाई भी बड़ी धूमधाम से हुई,,, चार-पांच दिन बीत चुके थे एक दिन महर के पास उसकी स्कूल फ्रेंड का फोन आता है,,,
महर, फोन उठाकर - हे प्रिया...कैसे कॉल किया....
प्रिया, सामने से - क्यों कॉल करने के लिए कारण होना जरूरी है क्या...?
महर, मुस्कुराते हुए- नहीं....पर मुझे पता हैं तु बिना रीजन के तो कॉल करने वाली है नहीं... इसलिए बता क्या  जरूरत आ पड़ी है तुम्हें मेरी....
प्रिया, सामने से - मास्टरमाइंड... सही पहचाना तूने, मुझे कुछ जरूरी बात ही करनी थी तुमसे और वह भी तुम्हारे लिए ही है...
महर, उत्साहित होकर - अच्छा.. तेरी शादी है क्या...
प्रिया- नहीं मेरी मां...मेरी शादी होगी भी तो उसमें तुम्हारी कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मुझे... मुझे यह बताना था कि मेरे शहर से मनाली की एडवेंचर है जिसमें मनाली की चंद्रखणी पास(मनाली की तीसरी बड़ी बर्फीली पहाड़ी) की ट्रैकिंग भी होगी, जो ट्रैकिंग करना चाहता है उसके लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं और सबसे पहले पहाड़ी पर पहुंचने वालों को स्कॉलरशिप भी दी जाएगी और उसे आगे की कैरियर के लिए खास ट्रेनिंग भी दी जाएगी,,,,,,,
महर, खुशी से उछलते हुए- क्या.. सच में और तू जा रही है....
प्रिया- तुम्हें पता है मुझे यह ट्रैकिंग वगेरहा बिल्कुल पसंद नहीं पर हम सारे ग्रुप वाले जा रहे हैं केवल मनाली घूमने... तुम्हें तो ट्रैकिंग में इंटरेस्ट है ना इसलिए तुम भी चलना हमारे साथ... इससे अच्छा मौका तुम्हें फिर कभी नहीं मिलेगा....
महर तो कब से इसी मौके की तलाश में थी उसने कहा- थैंक यू यार.. मैं भी कब से यही मौका ढूंढ रही थी मैं घर पर बात करके कल तुम्हें बता दूंगी.. वैसे कब जा रहे हैं.... प्रिया - चार दिन बाद... तुम सुबह बता देना... 
मेहर - ठीक है.. बाय...
महर फोन रखकर वही उछलने लगती है जैसे उसे सब कुछ मिल गया हों,,,
महर दौड़ते हुए बाहर सबके पास आती है, वह कितनी खुश थी उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था,,,
महर की दादी-  क्या मिल गया तुम्हें, जो इतनी भागी जा रही हों...
महर, उनके गले में हाथ डाल कर चहकते हुए- दादी मनाली की एडवेंचर...  चंद्रखणी पास ट्रेकिंग... गोल्डन चांस मिल गया दादी.......
शारदा (महर की मम्मी)- यह क्या पहेलियां बुझा रही है साफ-साफ बता क्या कहना चाहती हैं......
महर, सबकी तरफ देखकर-  प्रिया के शहर से मनाली की एडवेंचर है और वहां चंद्रखणी पास की ट्रेकिंग भी होगी,, सबसे पहले पहुंचने वालों के लिए स्कॉलरशिप और आगे के लिए ट्रेनिंग भी दी जाएगी,,,,,,,
सब महर की तरफ देखते फिर एक दूसरे की तरफ,,,, 
महर, उन्हें इस तरह देखकर - क्या हुआ...
शारदा- तु जाना चाहती है वहां....
महर- हां मम्मी.. मैं कब से यही मौका तलाश रही थी अब मौका मिला है तो मैं क्यों नहीं जाऊंगी... आप पापा से बात करना... प्लीज़
दादी - अगर तेरी इच्छा है और तेरे दोस्त जा रहे हैं तो तुम्हारे पापा क्यों मना करेंगे.. हम उनसे बात कर लेंगे... महर अपनी मां की तरफ देखती है तो उन्होंने भी हां बोल दिया, मेहर के पापा घर पर नहीं थे तो उन्हें इस बारे में कुछ मालूम नहीं था सब के कहने पर महर ने प्रिया को जाने के लिए बोल दिया था।
महर खुद पापा से बात करके उन्हें सब कुछ बताना चाहती थी पर मौका ही नहीं मिला, वह जाने की तैयारियां करने लगी, 7 दिन का कैंप था तो उसने एक बड़े से बैग में कपड़े और आवश्यक वस्तुओं को पैक कर के रख दिया था । दो दिन में महर के सारे दोस्त और परिवार को पता चल चुका था क्योंकि महर की एक्साइटमेंट सब कुछ बिना कहे बता रही थी,, यह सबके लिए भले ही एक मामूली बात हो लेकिन महर के लिए किसी वरदान से कम नहीं था । सुबह 9:00 बजे महर को घर से निकलना था उसके घर से प्रिया का शहर लगभग 11से12 किलोमीटर दूर था, आज रात महर की आंखों में बिल्कुल नींद नहीं थी, वह टेबल पर खिड़की के पास बैठी थी उसके सामने उसकी डायरी पड़ी थी और हाथ में पेन था , आज वह डायरी मे अपनी खुशी बयां कर रही थी , उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट थी,वह लिखना शुरू करती हैं,,,
Hii
   मैं बता भी नहीं सकती कि आज मैं कितनी खुश हूं, ऐसा लग रहा है सब कुछ एक सपना हो जो आंखे खोलते ही आंखों से ओझल हो जाएगा... जब 10 साल की थी तब अरुणिमा सिन्हा मेंम का किस्सा सुना था पैर न होने के बावजूद उन्होंने माउंट एवरेस्ट फतह किया, मेरे तो हाथ पैर सब कुछ है तो मैं क्यों नहीं कर सकती... बछेंद्री पाल, अरुणिमा सिन्हा, प्रेमलता अग्रवाल, संगीता बहल, मलावत पूर्णा, संतोष यादव, काम्या कार्तिकेयन, अंशु जामसेपा, नुग्शी ताशी मलिक, शिवांगी पाठक जिसने 16 की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह किया और भी कितनी महिलाओं ने पर्वतरोही बन देश का नाम रोशन किया,, उन्होंने भी शुरुआत ट्रैकिंग से ही की थी, तो मैं उनमें से एक क्यों नहीं बन सकती... हिमाचल प्रदेश की ऊंची ऊंची बर्फीली पहाड़ियों की चढ़ाई करना कितना अमेजिंग होगा...किसी भी हालत में मुझे सबसे पहले चंद्रखनी पास का रास्ता तय करना होगा ताकि मैं आगे की ट्रेनिंग ले सकूं अब बस जल्दी से सुबह हो जाए और मैं अपने सपनों के सफर पर निकल जाऊं.....
                                                             महर
महर ने डायरी को साइड में रखा और सोने चली गई आंखों में बिल्कुल नींद नहीं थी बस सुबह उगने वाले सूरज का इंतजार था,,,,,,
अगले दिन
सुबह सबसे आखिरी में उठने वाली महर आज 5:00 बजे ही उठ गई थी,, वह बार-बार अपने सामान को देख रही थी कि कहीं कुछ छुट न जाए,यह सुबह महर के लिए खास थी पर बाकी सब के लिए तो हर रोज की तरह ही थी तो सब अपने अपने काम के लिए निकल गए,, महर के पापा भी कुछ काम से कहीं बाहर चले गए,,, 8:00 बज गए थे महर तैयार हो चुकी थी लेकिन घर पर कोई नहीं था जो महर को प्रिया के घर छोड़कर आ सके,,,,, 
दादी.. पापा कहां गए... मेरे पास एक घंटा बचा है और प्रिया के घर जाने में 45 मिनट लगती है, आपने उन्हें बताया नहीं क्या... महर परेशान होकर बोली,,,
मैंने सुबह ही बताया था उसे कि तू जा रही है.. उसने कुछ नहीं कहा मुझे, मैंने सोचा उसे पहले से पता होगा.... दादी ने कहा,,,,
महर - नहीं दादी.. आपने और मम्मी ने कहा था आप बात कर लेगी तो मैंने नहीं पूछा उनसे... 
महर, अपनी मम्मी के पास आकर-  मम्मी.. अपने पापा को बताया नहीं कि यह ट्रिप मेरे लिए कितनी जरूरी है.. वो ऐसा कैसे कर सकते हैं.... 
शारदा, उसे समझाते हुए-  ऐसा कुछ नहीं है बेटा.. तुम जानती हो ना अपने पापा को, उन्हें तुम्हारी फिक्र है वह बस थोडे नाराज थे तुमसे कि तुमने बिना उन्हें कुछ बताए इतना बड़ा फैसला ले लिया लेकिन हमने समझाया था उन्हें कि तुम  बात करना चाहती थी पर इतना मौका ही नहीं मिला तो उन्होंने कुछ नहीं बोला,,,,
महर को अपना सपना टूटता हुआ नजर आ रहा था उसके चेहरे पर उदासी झलक आई थी, वक्त बीत रहा था,,, महर के पास प्रिया का कॉल आता है - हेलो महर, कितनी देर लगेगी तुम्हें... एक घंटे में बस स्टार्ट होने वाली है,,, प्रिया ने सामने से कहा,,,,
महर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें तभी उसकी नजर दरवाजे पर जाती है जहां से उसके पापा आ रहे थे,, महर के चेहरे पर उन्हें देखकर मुस्कुराहट लौट आती है उसने प्रिया से कहा- तु वेट कर.. बस आधे घंटे में मैं  पहुंच रही हूं...
कहकर महर ने फोन रख दिया और अपने पापा के पास आई जो पैदल ही आ रहे थे,,,
बाकी बच्चों की तरह महर अपने पापा से फ्रैंक नहीं थी वैसे तो उसके पापा उसे कुछ नहीं बोलते थे लेकिन वह उनकी बहुत इज्ज़त करती थी, उन्होंने एक बार किसी चीज के लिए मना कर दिया तो महर ने कभी उसकी जीत नहीं कि,,,,
महर, उनके पास आकर धीरे से बोली- पापा मुझे लेट हो रहा है...
कितने बजे निकलेगी... महर के पापा ने बिना किसी भाव के पूछा,,,,
महर - 9:00 बजे बस रवाना हो जाएगी... बिल्कुल टाइम नहीं है पापा...
लेकिन घर पर तो बाइक भी नहीं है और न कोई और साधन कैसे जाएगी........
पापा किसी के पास तो होगी ना..  आप भाई के पास कॉल कीजिए वह आ जाएगा... महर बोली,,,,
विनोद (महर के पापा) बिना कुछ बोले वहां से चले गए,,, महर के पास आधा घंटा बचा था वह चुपचाप अपने पापा के बोलने का इंतजार कर रही थी पर विनोद खामोश था उसने ना मना किया और ना हां बोला,,,
महर को उनकी  खामोशी चुभ रही थी,,, बाकी जैसे किसी को कोई मतलब नहीं था,,,
महर एकटक अपने पापा को देख रही थी कि वह कुछ तो बोले, काफी देर तक उनका कोई जवाब नहीं मिला तो महर अपने कमरे में आ गई उसने बुझे मन से प्रिया को कॉल लगाया- हैलो प्रिया.. सॉरी यार.. मैं नहीं आ सकती प्रिया-  क्या हुआ तुम्हें... अभी कुछ देर पहले तो बोल रही थी कि आधे घंटे में पहुंच जाएगी..
महर की आंखों से आंसू  गिरने लगते है, वह खुद को संभालते हुए बोली- हां लेकिन अभी मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं है मैं आ भी गई तो कोई फायदा नहीं...
महर ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलेगा.. एक बार और सोच ले- प्रिया ने कहा,,,
महर-  मैंने सोच लिया है... तुम सब मजे करना और हां मेरे पास फोटो सेंड कर देना....
महर बिना प्रिया की बात सुने फोन रख देती है इस वक्त वह कितनी टूट चुकी थी यह केवल वही जानती थी,, फिर भी उसने किसी से शिकायत नहीं की, उसने अपना सामान रखा और वापस बाहर आ गई,, विनोद वहां नहीं थे।
तभी विवेक भी बाइक लेकर पहुंच गया था वह महर के पास आया-  सॉरी महर, पता नहीं मेरे दिमाग से कैसे निकल गया... एक बार तू कॉल कर देती मैं वापस आ जाता...
महर, अपनी उदासी छिपाकर मुस्कुराते हुए- कोई बात नहीं भाई...
हमेशा खुश रहने वाली महर के चेहरे की उदासी सबको नजर आ रही थी लेकिन वह सबके सामने रोज़ की तरह ही मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी,,, उसके मन में बार-बार एक ही सवाल था कि उसके पापा क्यों खामोश थे क्या उन्हे उसकी खुशी दिखाई नहीं दे रही थी....
महर अकेली छत पर बैठी थी किसी गहरी सोच में, उसकी मम्मी उसके पास अगर कंधे पर हाथ रखती है मेहर अपनी आंखों के किनारे साफ करते हुए उनकी तरफ देखकर बोली- क्या हुआ मम्मी...
शारदा, उसे एकटक देखते हुए बोली-  देख रही हूं कि अपनी खुशी चिल्ला चिल्ला कर सबको बताने वाली अपना दर्द सबसे कैसे छुपाती है, मुझे पता है बेटा तुम्हें बहुत गुस्सा आ रहा है अपने पापा पर..लेकिन शायद कोई कारण होगा वरना आज तक उन्होंने तुम्हें किसी चीज के लिए मना किया है क्या...?
महर, उनकी तरफ देखती हैं जो थोडी उदास थीं महर, हंसते हुए बोली - कृपया हमें भावनाओं में फंसाने की गलती ना करें माताश्री... अब हम बच्चे नहीं हैं... कैसी लगी मेरी सुद्ध हिंदी..
शारदा भी हंसते हुए उसके गाल पर हाथ रखकर- तू नहीं सुधरेगी ना...
महर- बिल्कुल नहीं.. और आप भी इस बारे में बिल्कुल नहीं सोचेगी... सपना टूटा है मम्मी, थोड़ा दर्द तो होगा ही ना... लेकिन कोई बात नहीं कल नया देख लूंगी.. इसके लिए आप मुझे कल जल्दी नहीं उठाओगे...
शारदा, मुस्कुराते हुए गर्दन हिला देती है और वहां से जाने लगती है, महर पीछे से उनका हाथ पकड़कर-  पापा को बोल देना उनकी खामोशी ने एक उड़ते हुए पंछी के पर काट दिए... पता नहीं वह पंछी वापस उड़ भी पाएगा या नहीं...
इतना कहकर महर अपने कमरे में आ जाती है शारदा उसे जाते हुए देख रही थी ,,,,

कल रात को सपनो की पहली सीढ़ी चढ़ने की खुशी में महर की आंखों में नींद नहीं थी तो आज इतने दिनों से देख रहे ख्वाब के टूटने के कारण उसकी आंखों में नींद नहीं थी, वो वही खिड़की के पास बैठी थी हाथ में पेन था, सामने डायरी पड़ी थी और आंखों में नमी थी... आज वह अपना दर्द अपनी शिकायतें उस डायरी के पन्नों में लिख रही थी, यह पन्ना उसके पापा के नाम था जो शायद वो उन्हें सामने से नही बोल सकती थी,,, वह लिखना शुरू करती हैं,,,
  मुझे आप से कोई शिकायत नहीं है पापा.. और ना ही अपने टूटते सपने का दर्द है क्योंकि मुझे पता है अगर मेरा सपना मेरी किस्मत में लिखा होगा तो वह जरूर मिलेगा... लेकिन आज आपकी खामोशी कांटों की तरह चुभ रही है मुझे मेरे फैसले लेने का हक कब मिलेगा पापा.. मेरी जिंदगी की डोर मेरे हाथों में क्यों नहीं है.. क्यों मुझे उड़ने से पहले ही गिरा दिया.. क्यों आपने अभी तक आकर मुझे यह नहीं कहा कि इस वजह से मैंने तुम्हें रोका.. क्यों पापा....आपकी फिक्र ने मेरा ख्वाब तोड़ दिया.. क्या सच में सपने केवल कहानियों में ही पूरे होते हैं.. आज मैं हार गई पर अपने सपनों को बिखरने नहीं दूंगी आज का दिन शायद में कभी भूल नहीं पाऊंगी कि कैसे आप की चुप्पी ने मुझसे मेरा सुनहरा मौका छीन लिया, पर आगे नहीं.. आपको मुझे समझना ही होगा,,,,, 
                                                      आपकी महर
5 साल बाद 
महर की दादी, विनोद और शारदा बैठे थे विनोद के चेहरे पर आज भी वही खामोशी थी,,, शारदा उदास होकर बोली-  एक साल हो गया उसे घर से गए हुए... अब तो अपनी जिद छोड़ दीजिए... गलती क्या है उसकी यही ना कि आप के खिलाफ जाकर उसने अपने फैसले खुद लिए.. आखिर कब तक आपकी खामोशी के पीछे वो अपने सपनों को दबाकर रखती....
विनोद, गुस्से में - बस बहुत बोल दिया आपने और मैंने सुन लिया.. अब उस लड़की का नाम भी नहीं लेगा कोई यहां.. बाप हूं में उसका.. उसकी जिंदगी की हर फैसले लेने का हक है मेरा.. उसने अपने सपनों और परिवार में से किसी एक को चुनने का फैसला ले ही लिया तो अब हमें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि वह कहां है...?
क्यों पापा गलती क्या है दीदी की... यही ना कि उसने आपसे आपकी खामोशी का जवाब मांगा.. जिस तरह पिंजरे में बंद पंछी आजाद होने के लिए तड़पता है उसी तरह क्या हम बच्चों को कोई हक नहीं है खुले आसमान में उड़ने का... आदित्य (मेहर का छोटा भाई) विनोद के पास आकर बोला,,,,
विनोद किसी गहरी सोच में था, आदित्य उनके उनके पास बैठकर-  एक बार खुद को हमारी जगह रखकर देखिए पापा.. क्या आपका मन नहीं करता था कि आप खुद अपने फैसले लो.. अगर आपको एक मौका दिया जाता अपने आप को कुछ साबित करने का तो आप उस मौके का फायदा नहीं उठाते... मेहर दीदी ने हर बार अपने सपनों की कुर्बानी दी है आपके लिए, यह सोचकर कि एक दिन आप उन्हें जरूर समझोगे लेकिन आपने उन्हें कभी समझने की कोशिश ही नहीं की... अगर उस दिन भी मेहर दी ने आपकी बात मान ली होती तो आज वह उस मुकाम पर नहीं होती जहां अभी वो है ...आज उनका सपना पूरा होने को है पर उनके साथ उनका परिवार नहीं... क्यों पापा....
आदित्य एक चिट्ठी निकालता है और उसे विनोद के हाथों में थमाते हुए- यह मेहर दी ने भेजी थी मुझे कुछ दिनों पहले...आपको देने के लिए कहा था लेकिन कभी हिम्मत नहीं हुई,,,,
विनोद वो चिट्ठी लेकर उसे खोलता है जिसमें एक बड़ी सी कविता लिखी थी,,, 
नाजुक सी पली-बढ़ी एक
खूबसूरत से बगीचे की कली थी मैं,
रंग बिरंगे फूलों की महक
में खिलती सी खुशबू थी मैं,
क्या सपने क्या जीवन से 
बेखबर अपने ही अंदाज में जीती थी मैं,

एक दिन आसमान में 
अकेले पंछी को उड़ते देखा 
तो ख्याल आया दिल में 
क्या, मैं आसमान नहीं छु सकती..?

कुछ बड़ी हुई तो 
एक और सवाल आया मन में
आख़िर कौन हूं मैं..?
जवाब में केवल उस 
बड़े से बगीचे का नाम मिला,
फिर सवाल आया 
कि अगर दूर हुई उस 
बगीचे से तो क्या वजूद है मेरा...?

अनगिनत सवालों को लेकर
एक दिन खामोशी सी बैठी थी मैं,
की एक परछाई मुझसे आ टकराई
जब सवाल किया मैंने उसे
कि कौन हो तुम तो
वो मुझ पर ही  मुस्कुराई
कहा मुझसे कि पहले खुद को 
पहचानो मैं तुम्हें तेरे भीतर 
मिल ही जाऊंगी....
वो परछाई चली गई दूर मुझसे 
एक और सवाल छोड़ कर...

जब निकली ख़ुद के वजूद को ढूंढने
तो बिन उस बगीचे के एक नयी पहचान सी पाई..
मगर पलट कर देखा तो उस बगीचे मे
ख़ुद की जगह खाली सी पाई...

वजूद मिल गया था उस परछाई को
सपनो की आड़ में...
पर उस बगीचे की वो नन्हीं सी कली कहीं बेघर हो गई
सपनों की खोज में निकली वो कली
अपनों की महक से दूर हो गई ...
                                         आपकी महर

उस कविता को पढ़ते ही सबकी आंखों में आंसू थे मेहर ने कविता मैं अपने सारे सवालों के जवाब रख दिए थे, विनोद के हाथ कांप रहे थे उसकी आंखों के सामने वह दिन था जब मेहर घर छोड़कर जा रही थी,,,
मेहर की कॉलेज खत्म होने के बाद उसने विनोद से कहा था कि अब पहाड़ो की चढ़ाई करने के लिए किसी पहाड़ी इलाके में जाना चाहती है पर उस वक्त भी विनोद ने मना कर दिया,, आज से एक साल पहले मेहर ने एक फॉर्म भरा था ट्रेकिंग के लिए, उसमें उसे जगह मिल गई थी जहां उसे तीन महीनों के लिए बाहर जाना था और स्कॉलरशिप भी मिल रही थी, जब उसने विनोद को यह बात बताई तो इस बार भी उन्होंने मेहर को मना कर दिया,, मेहर के जिद्द करने पर विनोद ने उसके सामने शर्त रखी कि अगर वह जाना चाहती है तो कभी वापस लौटकर नहीं आएगी... मेहर बिना सवाल किए अपना सामान लेकर निकल गई,,,,
वर्तमान में,
शारदा, विनोद कंधे पर हाथ रखकर-  अभी भी वक्त है हमारे पास हमारी मेहर को वापस लाने के लिए...
विनोद ने अपना फोन निकालकर किसी के पास कॉल लगाया-  हेलो.. मैं मेहर का पिता बोल रहा हूं.. अब कितने किलोमीटर दूर है...?
सामने से कुछ कहा गया तो विनोद के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई उन्होंने फोन रख कर सबकी तरफ देखा जो उसे हैरानी से देख रहे थे,, 
विनोद बोला-  आप यही सोच रहे हैं ना कि मुझे कैसे पता कि मेंहर कहां है..? आपके सवालो का जवाब हैं मेरे पास... महर बेटी है मेरी... मैं कभी उसके सपनों के बीच नहीं आना चाहता लेकिन  हर बाप की तरह मुझे हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं मैं अपनी बेटी को खो ना दूं जो सपना वह देख रही थी उसे पूरा करने के लिए पहले मौत के कागजों पर साइन करना पड़ता है उस दिन वह घर छोड़कर गई तो मुझे उसके सपनों का पागलपन नजर आया.. जहां से उसके पास वह सूचना आई थी मैं उनसे मिला उसके बाद मुझे उसके पल-पल की खबर रहती थी की वह कहां है...? 
विनोद, मुस्कुराते हुए - पता है उसने भारत के 12 बड़े पहाड़ों की चड़ाई पुरी कर ली है जिनमें से 5 बार सबसे पहले रही तो 3 बार बहुत गहरे जख्म लगे हैं उसे,,, और अब वह वहां है जहां होना हर भारतीयों का गुरूर है इस बार हमारी बेटी अपनों के साथ सपनों की उड़ान भरेगी.......

माउंट कंचनजंगा नेपाल और सिक्किम की सीमा में स्थित है इस पर्वत की समुद्र तल से ऊंचाई 8586 मीटर है यह दुनिया का तीसरा सबसे ऊंचा पर्वत है और भारत का दूसरा,
9 दिन और 8 रातों के सफर के बात मेहर कंचनजंगा की सबसे ऊंची चोटी पर हाथ में भारत का तिरंगा लिए खड़ी थी, ट्रैकिंग ड्रेस, शूज पहने हुए, कंधे पर एक बैग था, चेहरे पर थकान थी पर जीत की खुशी भी... मेहर पहाड़ी से एक नजर चारों तरफ घुमाती है उसे पूरा संसार उस पहाड़ के सामने छोटा दिखाई दे रहा था, खुशी के आंसू उसकी आंखों से छलक रहे थे उसने उस छोटे-से तिरंगे को अपने सीने से लपेटा और ऊपर आसमान की तरफ देखने लगी जो उसे कुछ ही दूरी पर दिखाई दे रहा था, वह जी भर के उस सुकून को जीना चाहती थी,,,
मेहर वापस अपने कैंप में लौटती है जहां सब उसका इंतजार कर रहे थे उसके दोस्त दौड़ते हुए उसके पास आकर उसे उठा लेते हैं उनमें से एक लड़की बोली - यू आर ग्रेट मेहर..  11 दिन 10 रातो की ट्रैकिंग तुमने 9 दिन और 8 रात में खत्म कर दी,,, you are genius...
मेहर उनकी तरफ देख कर मुस्कुराती है तो एक दूसरी लड़की ने कहा - आगे क्या विचार है मेहर....
माउंट एवरेस्ट..... सब के पीछे से एक आदमी की आवाज आती है तो सब उसकी तरफ देखते हैं वहा मेहर के पापा खड़े थे उनके साथ महर के बड़े पापा और विवेकथा.... मेहर उनकी तरफ देखती है तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं विनोद मेंहर के पास आकर उसे गले लगाता है आज दोनों के बीच कोई खामोशी की दीवार नहीं थी ना किसी से कोई शिकायत थी,,,,, 
मेहर पुर डेड साल बाद अपने घर लौटी थी सब बहुत खुश थे और मेहर भी.....
मेहर ने वही अपनी पुरानी डायरी उठाई और पूरे जोश के साथ लिखा-  if you want to become a prefect dreamer, you never stop dreaming... (अगर आप एक अच्छे सपने देखने वाले बनना चाहते हैं तो सपने देखना कभी बंद मत कीजिए)
मेहर ने अपने प्रयास जारी रखें और माउंट एवरेस्ट की ओर रुख ले लिया... इस बार उसका परिवार और उसके सपने दोनों उसके साथ थे...,,,,,

@मनीषा नेटवाल


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मंगलवार, 27 सितंबर 2022

खुबसूरत सफ़र कि शुरुआत

मां, मैं ऑफिस के लिए लेट हो रहा हूं, आइए आपको शर्मा अंकल के घर छोड़ देता हूं,,,,,, शौर्य अपने कमरे से बाहर निकलते हुए अपनी मां रेवती को आवाज लगाता है। रेवती तैयार होकर बाहर शौर्य के पास आती है,,,,
शौर्य अगर तुम और दीया भी मेरे साथ चलते तो उन्हें अच्छा लगता, आखिर तुम्हारी शादी में उन्होंने कितनी मदद की थी हमारी.... रेवती थोड़ा उदास होकर बोलती हैं।
शौर्य उनके चेहरे को अपने हाथों में पकड़कर मुस्कुराते हुए बोला-  बस इतनी सी बात थीं मां, पहले बोल देती तो मैं ऑफिस कैंसिल कर देता... कोई बात नहीं मैं आपके साथ शादी में चल रहा हूं अब तो खुश हो जाइए,,,,,
शौर्य की बात सुनकर रेवती के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कुराहट आ जाती है वह शौर्य को गले लगा कर - थैंक्यू बेटा... मुझे लगा पता नहीं तुम आओगे या नहीं इसलिए नहीं कहा....
शौर्य- आपकी खुशी से बढ़कर मेरे लिए कुछ भी नहीं है मां... इसलिए आप खुलकर मुझे बता सकती है।
रेवती मुस्कुराते हुए हा में सिर हिलाती है शोर्य तैयार होने अपने कमरे में चला जाता है,,,, अंदर शौर्य की पत्नी दीया फोन पर किसी से बात कर रही थी- लेकिन आप ने पिछले हफ्ते तो बताया था कि उनकी रिपोर्ट नॉर्मल है फिर अब......
सामने से डॉक्टर की आवाज आती है- देखिए मैडम, हम आपको वही बता रहे हैं जो सच है आप अभी हॉस्पिटल आकर चेक कर सकती है...।
दीया - ओके, मैं कुछ देर में पहुंच रही हूं....।
कहां जा रही हो दिया...?  कमरे में आते ही शौर्य ने दिया से पूछा,,,,,
दिया शौर्य को देखकर और परेशान हो जाती है शौर्य उसके पास आकर-  क्या हुआ...? तुम इतनी परेशान क्यों हो और कहां जा रही हो...?
दीया - शौर्य, डॉक्टर ने हॉस्पिटल बुलाया है वो मां की रिपोर्ट के लिए....
शौर्य - पर रिपोर्ट्स तो नॉर्मल थी ना.....
दीया,शौर्य के कंधे पर हाथ रखकर- डोंट वरी शौर्य.... बस एक बार देख लेते हैं ना... तुम ऑफिस जाओ मैं जा रही हूं डॉक्टर के पास....।
मैं ऑफिस नहीं जा रहा... मां के साथ शर्मा अंकल के बेटे की शादी में जा रहा हूं,,,, शौर्य ने जवाब दिया।
दीया, मुस्कुराते हुए- ठीक है, मां को अच्छा लगेगा तुम जाओ उनके साथ और उन्हें कुछ मत बताना...
शौर्य-  पर वह चाहती है कि तुम भी साथ चलो,,,
दीया - फिर हॉस्पिटल.... तुम उन्हें बोल देना की मेरी तबीयत ठीक नहीं है, अभी हॉस्पिटल जाना जरूरी है....
शौर्य को भी दीया कि बात ठीक लगती है तो वह अकेला तैयार होकर रेवती के पास पहुंचता है,,,,,,,
शौर्य को अकेला देख रेवती के चेहरे की मुस्कुराहट एक पल में गायब हो जाती है,,,,,,,
दीया नहीं आ रही.... उन्होंने शौर्य से पूछा,,,,,
नहीं मां, उसकी तबीयत ठीक नहीं है हम दोनों चलते हैं ना.... शौर्य उनके पास आकर बोला,,,,
मुझे पहले से ही पता था वह मेरे साथ कभी नहीं जाएगी...। इतना कहकर रेवती बाहर निकल जाती है,,,, शौर्य उनके पीछे-पीछे आते हुए बोला- आप कुछ ज्यादा ही सोच रही है मां, ऐसा कुछ नहीं है वह... शौर्य बोले जा रहा था लेकिन रेवती उसे नजरअंदाज करके कार में बैठ गई,,,, शौर्य को भी आगे कुछ बोलना ठीक नहीं लगा तो वह भी चुपचाप कार  ड्राइव करने लगा,,,, पूरे रास्ते कार में खामोशी थी शौर्य कुछ बोलना चाहता था लेकिन रेवती उसकी एक भी बात सुनना नहीं चाहती थी कुछ देर में दोनों शादी में पहुंचते हैं,,,,
इधर दीया डॉक्टर के केबिन में बैठी थी डॉक्टर दीया के हाथ में कुछ फाइल्स थमाते हुए बोले- यह रेवती जी की रिपोर्ट है पिछले हफ्ते की रिपोर्ट नॉर्मल थी लेकिन इस बार नॉर्मल नहीं है उनका सिर दर्द बढ़ता जा रहा है जो दवाइयां वह ले रही है उन्हें रेगुलर रखिए और ज्यादा से ज्यादा उनकी हैल्थ पर ध्यान दीजिए,,,,,,
दीया डॉक्टर के बताए अनुसार कुछ और दवाइयां खरीदती है और घर आ जाती है,,,,,,
इधर शादी में रेवती कुछ औरतों के साथ खड़ी थी उनमें से एक औरत ने कहा - रेवती जी, आपकी बहू नहीं आई....
नही उसकी तबीयत ठीक नहीं है..... रेवती ने मुस्कुराते हुए कहा,,,,,
यह आजकल की बहुए भी ना सब एक जैसी ही होती है हम उन्हें प्यार से अपने साथ लाना चाहते हैं और वह हमारे साथ ना आने के बहाने बनाती रहती है...,,, उनमें से एक औरत ने कहा,,,,,,,
रेवती के घावों को और गहरा करने के लिए यह बात काफी थी,,, वह बिना कुछ कहे वहां से आ गई। शौर्य शादी खत्म होते ही अपनी मां के साथ घर पहुंच गया था,,,,,,,
दीया ने शौर्य को रिपोर्ट के बारे में बता दिया था और उसने भी दिया से जोर देकर कहा था कि वह उसकी मां का ख्याल रखें दिया भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती रेवती को खुश रखने की और उनकी बीमारी को दूर करने की लेकिन आसपास की औरते रेवती को दीया की कमियां गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती,,,, इसलिए दिया और रेवती के रिश्ते में गलतफहमी के अलावा और कोई खास रिश्ता नहीं बन पाया,,,,,,,
शौर्य के पिता बचपन में ही खत्म हो गए थे दादा दादी गांव में दूसरे चाचा के साथ रहते थे, शौर्य अपनी मां के साथ शहर में रहता था जहां उसकी पोस्टिंग थीं... दो साल पहले रेवती ने ही दीया को शौर्य के लिए पसंद किया था शौर्य ने भी बिना कुछ कहे अपनी मां की पसंद की लड़की से शादी कर ली थी,,,,, दीया अच्छी लड़की थी उसने अपना केरियर, अपने ड्रीम्स सबकुछ छोड़ दीया था क्योंकि रेवती की हालत दिन दिन खराब होती जा रही थी और उसने इस बारे में कभी शौर्य से शिकायत भी नहीं की,, लेकिन दीया की कुर्बानियां और प्यार भी रेवती और  दीया के सास बहू के बीच की दूरियों को खत्म नहीं कर पाया,,,,,

मां.. मुझे कुछ सामान लेने बाहर जाना है, आपकी दवाइयां मैंने रख दी है आप टाइम से ले लेना....,,,, दीया ने रेवती के पास आकर कहा, जो अपने रूम में अकेली बैठी थी,,,,,,,,
रेवती ने बदले में दीया से कुछ नहीं कहा तो दीया उनके पास आकर बैठ गई, दीया ने उनकी तरफ देखकर धीरे से कहा- मा आप ठीक तो है ना.....
तुम्हें इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है दिया मैं खुद का ध्यान रख सकती हूं....रेवती ने थोड़े गुस्से में कहा,,,,,,
मां आप नाराज क्यों हो रही है, मैं बस पूछ रही हूं... दीया ने  तलीनता से जवाब दिया,,,,,,,,,,,
तुम जाओ यहां से, सामान लाना था ना....; रेवती ने कहा और उठ कर वहां से जाने लगी,,,,,,,,
मां अगर आपको मेरा बाहर जाना अच्छा नहीं लगता तो मैं कहीं नहीं जाऊंगी पर आप इस तरह बिहेव करना बंद कीजिए.... क्यों आपको मेरी हर बात बुरी लगती है..... दीया ने थोड़ी तेज आवाज में कहा,,,,,
रेवती, उसकी तरफ देख कर - तुम्हारी हर बात बुरी नहीं लगती, लेकिन तुम्हारा यह झूठा दिखावा बुरा लगता है, दूसरों के सामने अच्छा बनने का नाटक बुरा लगता है,,, सबके सामने मेरा ख्याल रखने का नाटक करती हो और जब मुझे तुम्हारी जरूरत होती है तुम मेरे पास नहीं होती तो क्या समझु इसे, तुम्हारा मेरा फिक्र करना या तुम्हारा झूठा नाटक.....
रेवती की बातें सुनकर दीया की आंखों में आंसू थे क्योंकि भले ही रेवती उनसे नाराज रहती हो लेकिन आज से पहले उन्होंने दीया से ऐसा कभी नहीं कहा था दीया बिना कुछ बोले वहां से अपने कमरे में चली जाती है,,,,,,,
शाम को शौर्य ऑफिस से घर आता है दीया ने उसके आने से पहले ही खाना लगा दिया था और खुद कमरे में चली गई थी शौर्य को कुछ अजीब लगा तो वह अपनी मां के रूम में चला गया, रेवती भी उदास अपने कमरे में बैठी थी,,, शौर्य, उनके पास बैठकर बोला- क्या हुआ मां.. वो दीया ने भी खाना नहीं खाया और आप भी नहीं आए बाहर.. सब ठीक है ना....
अपनी पत्नी से पूछ लो वह सब बता देगी...। रेवती ने कहा,,,,,,
शौर्य, अब परेशान होकर बोला- बात क्या है मां... दीया ने आपसे कुछ कहा....?
रेवती, आंखों में आंसू लिए बोली- मेरी बीमारी के कारण तुम  दोनों परेशान हो रहे हो ना... मुझे अकेला छोड़ दो और तुम दोनों अपनी जिंदगी आराम से जियो....
शौर्य उनकी गोद में सिर रखकर बोला- ऐसा आपको क्यों लगता है मां... क्या दीया ने आपसे यह कहा...,,
रेवती- नहीं.. पर मुझे ऐसा लगता है....
शौर्य, उनके आंसू पोछते हुए बोला - आप जानती है ना मां.. मेरे लिए आप से बढ़कर कुछ नहीं, कितना प्यार करता हूं आपसे, जब आपने अकेले मुझे पाल पोसकर इतना बड़ा किया.. काबिल बनाया तो आपको ऐसा क्यों लगता है कि मैं इस तरह आपका साथ छोड़ दूंगा... आज के बाद कभी ऐसा मत सोचना.....
रेवती को  संतुष्टि थी कि उसका बेटा उसके साथ है,,,,, शौर्य रेवती को उनकी दवाई देता है और उनको सुलाकर अपने कमरे में चला जाता है,,,
दीया की आंखों में अभी भी आंसू थे शौर्य उसके पास आकर बैठता है और उसके आंसू पोछते हुए बोला - क्या हुआ था घर में आज...
दीया, रोते हुए बोली - सॉरी शौर्य, मैं एक अच्छी बहू नहीं बन पाई शायद हमारे सास बहू के रिश्ते की दूरियां कभी कम नहीं हो पाएगी.... बहुत कोशिश की मैंने लेकिन अब मुझसे नहीं हो पाएगा, शायद मैं मां को अपनी बात समझा ही नहीं पाती हूं.. मैं कुछ और कहती हूं और वह कुछ और समझती है.....। दीया ने अपना पूरा दर्द शौर्य को सुना दिया था वह उसके कंधे पर सिर रखकर सिर्फ रोए जा रही थी,, शौर्य ने उसे चुप कराया और उसके सोने के बाद खुद छत पर आकर बैठ गया,,,, रेवती और दीया ने तो शौर्य को बताकर अपना मन हल्का कर लिया था लेकिन शौर्य किसे बताएं,, बाकी मर्दों की तरह उसने भी अपने आंसुओं और जज्बातों को छुपा कर अपनी आंखें बंद कर ली,,,,,,,,,

धीरे-धीरे रेवती और दीया के बीच की दूरियां बढ़ती जा रही थी और इसका सीधा असर शौर्य पर पड़ रहा था। वह ना अपनी मां को समझा पाता था ना पत्नी को,,,, दोनों की तकलीफों को सुनना और उन्हें अपने तरीके से खुश रखने की कोशिश करता पर उसका खुद का क्या.... वह तो दोनों तरफ से फंस चुका था,,, ऑफिस में भी काम पर मन नहीं लगता था दिन भर यही सोचता कि कैसे भी वह अपने परिवार को खुश रख सके,,,,,,,,
एक दिन शौर्य ऑफिस में बैठा कुछ सोच रहा था तभी उसका एक दोस्त उसके पास आकर बैठता है वह शौर्य को गुमसुम और चुपचाप देख कर बोला - शौर्य क्या हुआ तुम्हें, तुम कुछ दिनों से परेशान लग रहे हो....
शौर्य का कोई जवाब नहीं पाकर उसका दोस्त फिर से बोला - शौर्य, तुम वही शौर्य हैं ना, जो कॉलेज में रोते हुए को भी हंसा देता था जिसके पास सबकी प्रॉब्लम का सलूशन होता था.....
शौर्य उसकी बात पर हल्का सा मुस्कुराते हुए बोला- वह वक्त अलग था करण, अब सब कुछ बदल गया है जिस शौर्य  के पास सब की प्रॉब्लम का सलूशन होता था आज उसके पास खुद की प्रॉब्लम का भी हल नहीं है, जो सबको हंसाया करता था आज वह अपने परिवार को भी खुश नहीं रख पा रहा...,
करण, उसके कंधे पर हाथ रखकर- क्या बात है ब्रो, प्लीज मुझसे तो मत छुपा.....
शौर्य, करण को सब कुछ बता देता है करण कुछ सोच कर बोला- ये केवल तुम्हारे घर की प्रॉब्लम नहीं है शौर्य, हर परिवार की यही प्रॉब्लम है बस अपने घर की दिखती हैं और दूसरों की दिखती नहीं है.. इस रिश्ते में कभी मिठास नहीं हो सकती....
शौर्य, उदासी से - लेकिन मैं उन्हें इस तरह दुखी नहीं देख सकता......
करण - इसके लिए तो तुम्हें या तो दीया को डिवोर्स देना होगा या अपनी मां को छोड़ना होगा...,,,,
शौर्य तो उसकी बात सुनकर ही हैरान था उसने अपने दोस्त से इस तरह के जवाब की उम्मीद भी नहीं की थी,,,
शौर्य, करण को हेरानी से देखते हुए बोला - तुम होश में भी हो क्या बोल रहे हो... वह दोनों मेरी जिंदगी है.. उस मां को छोड़ दू जिसने बिना बाप के बेटे को अकेला पाला और उसको खुद के पैरों पर चलने के काबिल बनाया.. छः साल का था मैं, जब पापा हमें छोड़कर इस दुनिया से चले गए थे दादा-दादी, चाचू ,किसी ने मेरी जिम्मेदारी नहीं ली थी मेरी मां ने बहुत सी तकलीफो को सहा है  लेकिन कभी मुझे महसूस नहीं होने दिया चाहे खुद रोती रही लेकिन कभी मुझे नहीं रोने दिया उस मां को छोड़ दूं मैं... या उस पत्नी को जिसने मेरे सिर्फ एक बार कहने पर अपना सब कुछ छोड़ दिया, वेल एजुकेटेड होने के बाद भी अपने सपने अपना कैरियर सब छोड़ दिया केवल मेरी मां का ख्याल रखने के लिए और नहीं कभी मुझसे शिकायत की, खुद से पहले मेरे और मां के बारे में सोचती हैं आज तक कुछ नहीं मांगा उसने मुझसे...उस पत्नी को छोड़ दूं,,,,मैं दोनों से बहुत प्यार करता हूं इनमें से किसी को नहीं छोड़ सकता... 
करण, मुस्कुराते हुए बोला - मैं जानता हूं भाई की दोनों तुम्हारे लिए इंपॉर्टेंट है और यह भी पता है कि वह दोनों भी एक दूसरे की फिक्र करती है लेकिन वह समझ नहीं पा रही तुम्हें उन्हें एक दूसरे की कीमत समझानी होगी...शौर्य को बहुत कुछ समझ आ रहा था वह कुछ देर करण से बात करता है और अपने घर आ जाता है,,,,,
शौर्य सीधा अपनी मां के कमरे में आता है वह उनके पास आकर बोला- मां मुझे आपसे कुछ इंपॉर्टेंट बात करनी है... रेवती को शौर्य के चेहरे की उदासी साफ नजर आ रही थी वह घबराते हुए बोली- क्या हुआ बेटा, क्या बात करनी थी...
मैं, दीया को डिवोर्स दे रहा हूं....। शौर्य ने एक सांस में अपनी बात कह दी,,,,
यह सुनते ही रेवती के हाथ से पानी का गिलास छूट कर निचे गिर जाता है आवाज़ सुनकर दीया भी आ जाती हैं लेकिन वह कमरे के बाहर ही खड़ी थी,,, 
शौर्य ने फिर अपनी बात दोहराई - हां मां मैं दीया से डिवोर्स चाहता हूं....
रेवती ने शौर्य के गाल पर थप्पड़ रख दिया और उसकी कॉलर पकड़कर बोली- वह पत्नी है तुम्हारी, शादी की है तुमने उससे...कोई खेल नहीं खेला...
शौर्य उनसे थोड़ा दूर जाकर -मुझे पता है मां, कि वह मेरी पत्नी है लेकिन अब मैं उसके साथ नहीं रह सकता....
बाहर खड़ी दीया इस वक्त पूरी तरह टूट चुकी थी लेकिन वह हिम्मत करके वही खड़ी थी यह जानने के लिए की शौर्य उसे तलाक क्यों देना चाहता है,,,,,,
रेवती, गुस्से में शौर्य से बोली- क्यों देना चाहते हो तलाक.... क्या नहीं किया उसने तुम्हारे लिए, अपनी इच्छा अपना परिवार सब कुछ छोड़ कर वह इस घर में आई है एक पत्नी होने का हर फर्ज उसने पूरी तरीके से निभाया है... और जीते जी मैं तुम्हें उसे तलाक नहीं देने दूंगी... 
शौर्य- शादी के बाद लड़की केवल पत्नी नहीं बनती मां, बहू भी बनती है और मुझे नहीं लगता कि दीया आपकी अच्छी बहू बन पाई है...
रेवती- किसने कहा तुम्हें, कि वह एक अच्छी बहू नहीं है.. मैं गलत हो सकती हूं बेटा पर दीया नहीं....दीया कहीं नहीं जाएगी मैं खुद यह घर छोड़कर गांव चली जाऊंगी हिम्मत भी मत करना दीया को तलाक देने की,,,,,
शौर्य बिना उनकी तरफ देखकर बोला- मैंने फैसला ले लिया है मां, मुझे पता है कि अब मुझे क्या करना है,,,,,
दीया रेवती और शौर्य की बातें सुन रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह रोए या खुश हो क्योंकि रेवती उसका पक्ष ले रही थी वह अपने कमरे में आ जाती है कुछ देर में शौर्य भी अपने कमरे में आता है,,,,, उसके पीछे-पीछे रेवती भी आती हैं लेकिन उसने अंदर जाना ठीक नहीं समझा तो वह बाहर ही खड़ी हो गई,,,,,,,
शौर्य कुछ बोलना चाहता था लेकिन कैसे कहे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था दीया समझ रही थी कि शौर्य उसे क्यों नहीं बता रहा इसलिए वह खुद उसके पास आकर खड़ी हो जाती है शौर्य उसकी तरफ देखता है लेकिन वह कुछ नहीं बोलता तो दीया उसके पास आकर बोली- कुछ कहना चाहते हो....
शौर्य, उसकी तरफ देख कर बोला- हां... मैंने सोचा है कि मां को गांव भेज देते हैं उनकी दवाइयां पैसे वगैरह हम यहां से भेज देंगे और तुम भी फिर से अपना कैरियर शुरू कर सकती हो.....
रेवती बाहर से शौर्य की बातें सुन रही थी उसका बेटा ऐसा कह सकता है उसने कभी सोचा भी नहीं था पर वो खुशी भीं थी कि अब वह दीया को तलाक नहीं देगा,,,,
दीया हैरानी से शौर्य की तरफ देख कर - तुम पागल तो नहीं हो गए शौर्य... अपनी मां को दूर भेजना चाहते हो.. शौर्य-  हां, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि तुम दोनों एक साथ रहो.....
दीया - मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था शौर्य, कि मैं तुम्हारी मां को तुमसे दूर करूं.....मैंने हमेशा कोशिश की, कि मां को कभी ऐसा नहीं लगे कि मैं उनसे उनका बेटा छीन रही हूं... भले ही मेरी और मां की सोच नहीं मिलती हो, हम दोनों एक दूसरे से नाराज रहते हो मगर मैंने कभी उनके बारे में गलत नहीं सोचा... you know हर लड़की की तरह मेरे भी सपने थे कि मैं भी जॉब करूं... अपने हस्बैंड के साथ वेकेशन पर जाऊं लेकिन तुमने जब मुझसे कहा कि मैं तुम्हारी मां का हमेशा ध्यान रखू, उन्हें किसी की कमी महसूस नहीं होने दु तब से मैंने हमेशा यही कोशिश की कि मैं उन्हें खुश रख पाऊ... लेकिन हमारे समाज की वह एक दकियानूसी सोच "ना बहू बेटी बन सकती हैं, ना सास मां बन सकती" ने कभी इस रिश्ते को खूबसूरत नहीं बनने दिया...
शौर्य - तो तुम क्या चाहती हो....
दीया, उदासी भरी मुस्कुराहट के साथ बोली- यही कि, मैं अभी यह घर छोड़कर चली जाऊंगी, तुम अपना और मां का ख्याल रखना.. याद रखना शौर्य की एक अच्छा पति वही बन सकता है जो पहले एक अच्छा बेटा हो.... जो अपने मां बाप का नहीं हों सकता वो इंसान पत्नी का भी कभी नहीं हों पाएगा,,,,,

इतना कहकर दिया चुपचाप अपना सामान पैक करने लगती हैं शौर्य की आंखों में आंसू थे लेकिन गर्व भी था कि दीया उसकी पत्नी है उसकी सोच मां के लिए बिल्कुल पाक है फिर भी वह दीया को जाने से रोकना नहीं चाहता था क्योंकि वह अपनी मां और पत्नी के बीच एक खूबसूरत रिश्ते की शुरुआत करना चाहता था,,,,,,,,,
रेवती दीया की बातें सुनकर अपने कमरे में आ जाती है और दरवाजा बंद करके वहीं बैठकर रोने लगती है उसे खुद पर ही घिन्न आ रही थी कि उसने दूसरों की बातों में आकर अपनी उस बहू को ही नहीं समझा जिसने उसके लिए क्या कुछ नहीं किया यहां तक अपना सब कुछ केवल उसके लिए छोड़कर जा रही है अब उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह दीया के पास जाकर उसे बात कर सके.. उसे रोक सके....
दीया अपना सामान लेकर बाहर आती हैं और रेवती के बंद कमरे की तरफ देखती है उसकी आंखों में नमी और चहरे पर खुशी थीं कि कहीं ना कहीं रेवती भी उसे अपना समझती है,,,,,,
दीया घर से निकल जाती है शौर्य केवल उसे जाते हुए देख रहा था वह खुद से ही बोला- सॉरी दीया, लेकिन तुम्हारी इस बार की कुर्बानी खाली नहीं जाएगी... तुम जल्द अपने घर वापस आवोगी....

अगले दिन
रात को शौर्य रोज की तरह छत पर बैठा अपनी ही सोच मे गुम था,,,,,,तभी उसके पास रेवती आकर बैठ जाती है,,,,
शौर्य उन्हें देख कर मुस्कुराते हुए बोला - मां आप यहां... सोई नहीं अभी तक....
अपने ही बेटे का घर उजाड़ कर कैसे एक मां सो सकती है... रेवती ने उदास होकर कहा,,,,
शौर्य- आपने कुछ नहीं किया मां... इतना मत सोचो चलिए नीचे अभी, आपने खाना भी नहीं खाया....
दीया के हाथ के खाने के अलावा किसी खाने में स्वाद लगता ही नहीं, मुझे तो दवाइयों का भी नहीं पता कि कब कौनसी लेनी है.. यह भी नहीं मालूम कि घर में महीने का कितना राशन आता है, नहीं मालूम कि घर में बिजली का बिल कितना आता है घर की खुशियां किस चीज में है.. मेरे बेटे की खुशी किस बात में है,,,, रेवती रोते हुए बोले जा रही थी,,,,,,
मैं दीया के घर जाउंगी...अपनी बहू को लेने नहीं बल्कि  अपनी बेटी को उसके घर वापस लाने,,,,,, रेवती में मुस्कुराते हुए कहा।
शौर्य के चेहरे पर आज अलग ही खुशी थी जैसे उसने कोई युद्ध जीत लिया हो,,,
वह रेवती के गले लगकर बोला- थैंक्यू मां.. आपको नहीं पता कि अपने दिया को अपनी बेटी कहकर मुझ पर कितना बडा एहसान किया है.... मैं हमेशा आप दोनों को खुश देखना चाहता हूं.… चाहता हूं कि आप दोनों के बीच एक खूबसूरत रिश्ता बने,,,,, आप दोनों मेरी लाइफ की स्पेशल लेडीज हो.. थैंक यू मां...
रेवती,अपना हाथ शौर्य के हाथ में रखकर बोली - मैं वादा करती हूं तुमसे, दीया ने मेरे लिए जितना किया मैं उसके लिए उसका दोगुना करूंगी... कभी वह मुझसे नाराज भी हो जाएगी तो मां का हक जताकर उसे वापस मना लूंगी... उसकी तबीयत खराब हुई तो मां की तरह पूरी रात उसका ख्याल रखूंगी, उसके लिए वह सब कुछ करूंगी जो उसकी खुद की मां उसके लिए करती... एक मां अपनी बेटी के लिए जो करती है वह सब करूंगी... आगे से किसी और की बात सुनकर अपनी सासगिरी नहीं दिखाऊंगी....
शौर्य, हंसते हुए - ऐसे तो मेरा प्यार बट जाएगा मां...
रेवती भी उसकी बात पर हंसने लगती है,,,,,,
अगले दिन सुबह
दीया अपने मम्मी पापा के घर पर सबके साथ बैठी थी,,, उसने वहां की कोई बात यहां नहीं बताई थी बस इतना कहा था कि कुछ दिनों के लिए वह यहां आई है क्योंकि उसे उम्मीद थी कि शौर्य और रेवती  उसे लेने जरूर आएंगे ,,,,,,

कुछ देर में दरवाजे की बेल बजती है,,,,तो दिया का भाई उठकर दरवाजा खोलता है सामने रेवती और शौर्य खड़े थे दिया उन्हें देखकर ही खुश हो जाती है,,,,, सब उठकर उनके पास आते हैं और उन्हें अन्दर लेकर आते हैं,,, सबसे बातें करने के बाद रेवती उठकर दिया के पास आकर बोली - अपनी बीमार सास को कौन अकेला छोड़ कर आता है....? यह मालूम होते हुए भी कि उन्हें दवाइयां भी टाइम पर लेना नहीं आती....
 इतना कहते ही रेवती की आंखों में आंसू आ जाते हैं दिया भी रोते हुए उनके गले लग जाती है,,,,
शौर्य के अलावा किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की यह सब क्या हो रहा है.....
रेवती दीया के सिर पर हाथ फेरते हुए बोली - आज तुम्हें तुम्हारी सांस नहीं बल्कि, तुम्हारी मां तुम्हें लेने आई हैं,, चलोगी ना मेरे साथ हमारे खूबसूरत रिश्ते की शुरुआत के लिए...
दिया मुस्कुराते हुए हां में सिर हिलाती है और अपना सामान लेने कमरे में चली जाती है कुछ देर में वह अपना सामान लेकर बाहर आती हैं और अपने परिवार से मिलकर रेवती और शौर्य के साथ वापस अपनी दुनिया में आ जाती हैं,,,,,
कुछ दिनों बाद
शौर्य और दिया डाइनिंग टेबल पर बैठे रेवती का इंतजार कर रहे थे कुछ देर में वह अपने कमरे से बाहर आती है उनके हाथ में एक लिफाफा था,,, वह दीया के पास आकर वह लिफाफा उसे थमाते हुए - NGO के पूरे डाक्यूमेंट्स तैयार है कल से अपना काम स्टार्ट कर देना.... 
शौर्य और दिया हैरानी से देखते हैं तो वह बोली- हां मैंने ही बनवाए  हैं एक बार सुना था तुम्हारे मुंह से कि तुम अपना खुद का NGO स्टार्ट करना चाहती हो तो मैंने अपने अकाउंट में जितने पैसे थे उनमें यहीं पास में एक फ्लैट खरीद लिया और जरूरी डाक्यूमेंट्स भी तैयार करवा लिए.....
आज शौर्य का अपनी मां के लिए सम्मान और बढ़ गया था,,,, दीया उनके पास आकर बोली- लेकिन मां आप अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है और आप घर पर अकेली कैसे रहेगी.......
अकेला कौन रहेगा बेटा....NGO के 7 मेंबर्स में एक मैं भी हूं वहीं तुम्हारे साथ रहूंगी और वहां तू है ना मेरा ख्याल रखने के लिए...... रेवती ने मुस्कुराते हुए कहा,,,,,
दीया, उनके गले लगकर - थैंक यू मा... थैंक यू सो मच... यू आर द बेस्ट.....
शौर्य दोनों को खुश देखकर खुश था क्योंकि जो खूबसूरत रिश्ता वह अपनी मां और पत्नी के बीच बनाना चाहता था वो बन गया था वह अपना खाना खत्म करके बाहर आता है और किसी को कॉल लगाता है
हेलो करण... थैंक यू यार..... आज ऑफिस नहीं तू मेरे घर आएगा... मां और दीया के खास दिन को सेलिब्रेट करने...
करण, सामने से - okk bro... I am coming soon...
शौर्य मुस्कुराते हुए अपना फोन रखता है और अपनी कार लेकर वहां से निकल जाता हैं,,,,,,,


मनीषा नेटवाल...✍️✍️

सास बहू का रिश्ता जिसका नाम होते हुए भी वह गुमनाम है,,,, वक्त बदल रहा है और उसके साथ रिश्ते भी लेकीन इस रिश्ते में आज भी कोइ खास बदलाव नही है.... हम अपने देश की कमियां ढूढने में लगे हुए है लेकिन असली कमी हमारे घर में है जो परिवार को अंदर से खोखला बना रहीं हैं... गलत कोइ नही होता बस जनरेशन डिफरेंस जो इस रिश्ते की नीव को कमज़ोर बना रहा है और इन सबके बिच फसता एक बेटा और पति..... हर कहानी शौर्य जैसी नहीं होती.... एक औरत अपना दर्द अपने emostioms, आदमी के साथ बात सकती हैं लेकीन वो आदमी.... क्या उसे तकलीफ़ नहीं होता,, उसके emostions नहीं होते... होते है पर शायद हम समझ नहीं पाते.... कितनी तकलीफ़ होती होगी उसे जब उसकी जिन्दगी की दो खास औरते अलग अलग राह पर खड़ी होगी... और उसे उनमें से किसी एक की तरफ़ से बोलना हो....... जब लड़कियो और औरतो की बात आती हैं तो किताबे भी रोने लगती है लेकिन बात अगर एक लड़के की तो किताबे भी उसे कायर कहेगी.....खैर.....


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सोमवार, 26 सितंबर 2022

ये जिंदगी तुम्हारी है

H.K.N. engineering college of Delhi, (काल्पनिक नाम) की चार मंजिला बिल्डिंग के नीचे पिछले एक घंटे से भारी भीड़ जमा थी,, कॉलेज स्टूडेंट्स, टीचर्स और आसपास के कुछ लोग खड़े थे,,, सबकी नजरें बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर टिकी थी, जहां एक 24- 25 साल की लड़की छत के ऊपर खड़ी थी,,,। नीचे उस लड़की की मां, पिता, भाई और दोस्त उसका नाम लेकर रो रहे थे, तो कुछ लोग उन्हे चुप करा रहे थे।
पिता के एक हाथ में माइक था और दूसरे हाथ में फोन पकड़े हुए थे,,,
पिता, रोते हुए उस लड़की की तरफ देखकर - तनु... बेटा नीचे आ जाओ... हम घर जाकर इस मसले पर बात करेंगे... हम रोहन को समझाएंगे... मैं उसके सामने हाथ जोडूंगा उसके पैरों में तक गिर जाऊंगा, लेकिन तुम यह पागलपन मत करो बेटा...... प्लीज निचे आ जाओ....।
तनु, रोते हुए- प्लीज डेड.... आप चले जाइए यहां से.... छोड़ दीजिए मुझे, मेरे हाल पर..... मैं उसके बिना नहीं जी सकती...Please Leave me alone ded.....
तनु की मां, फोन हाथ में लेकर रोते हुए - तुम जो कर रही हो वह ठीक नहीं है बेटा.. हम सब है ना तेरे साथ... We all love you so much Tanu... अगर तुमने छत से गिरने की कोशिश की तो मैं भी यहीं अपनी जान दे दूंगी......
तनु, रोते हुए- मॉम... प्लीज आप चले जाइए यहां से... थक चुकी हूं मैं, खुद से लड़ते-लड़ते.... अब और नहीं लड़ा जाएगा मुझसे.... अगर मेरे प्यार करने की यही सजा है तो मुझे यह सजा मंजूर है मॉम... नहीं भुला सकती मैं उसे.....
वहा खड़ा हर शख्स घबराया हुआ था,,, मीडिया और पुलिस भी यहां पहुंच चुकी थी,,,,,
एक पुलिस अफसर माइक हाथ में लेकर- देखो बेटा.... जिस जगह तुम खड़ी हो उस जगह से पिछले महीने भी दो लड़कियों ने कूदकर जान दी थी,, एक साल में कम से कम चार पांच लड़कियां ऐसे ही अपनी जान दे देती है... तुम इस कॉलेज के प्रोफेसर की बेटी होकर ऐसा क़दम उठाओगी तो बाकी लड़कियां भी ऐसा ही करेगी... नीचे आ जाओ तनु.... देखो अपने परिवार को.. अपने फ्रेंड्स को, सब तुम्हारे लिए कितना परेशान है.. किसी एक इंसान के लिए तुम इतने लोगों के प्यार को नजर अंदाज कैसे कर सकती हो.... छत का दरवाजा खोलो बेटा... मैं अभी ऊपर आ रहा हूं....।
तनु- नहीं सर.. अगर आपने ऊपर आने की कोशिश की तो मैं अभी इस छत से कूद जाऊंगी....।

एक-डेढ़ घंटे से चल रहे इस तमाशे में सबसे पीछे प्लेन खादी साड़ी पहने एक 29-30 साल की लेडी खड़ी थी जो यह सब देखकर मुस्कुरा रही थी,,,,,, वह थोड़ा आगे आकर एक लड़की से पूछती है- यह सब क्या हो रहा है.....।
वह लड़की ऊपर तनु की तरफ इशारा करते हुए : यह ऊपर छत पर जो लड़की खड़ी है उसका प्रेमी उसे छोड़कर भाग गया.... दोनों पिछले पांच सालों से एक दूसरे से प्यार करते थे... आप कौन है...? इस कॉलेज में तो नहीं देखा कभी...।
आई एम अनन्या.... मैं तो इधर से जा रही थी भीड़ देखी तो यहां आ गई... लगता है मामला थोड़ा सीरियस है, पुलिस और मीडिया भी है,,,,, वह बोलती है।
वह लड़की - इस कॉलेज के प्रोफेसर की बेटी है केस तो सीरियस होगा ही ना... वरना साल में ना जाने कितनी लड़कियां यहां से कूदकर या फांसी लगाकर सुसाइड कर लेती है... कोई ध्यान तक नहीं देता.....।
अनन्या आगे आती है और पुलिस वाले से कुछ बात करके उनसे माइक लेकर ऊपर तनु की तरफ देखते हुए - हे तनु..... वही रुकना यार... मुझे भी सुसाइड करना हैं बहुत दिनों से किसी का साथ ढूंढ रही थी प्लीज... मुझे अकेले मरने से डर लगता है,,
सभी हैरानी से अनन्या की तरफ देखते हैं। अनन्या माइक उस पुलिस वाले के हाथ में वापस थमाकर अंदर चली जाती है,,,,,
पुलिस वाला चिल्लाते हुए- हे... क्या कर रही हो तुम... तुम ऐसा नहीं कर सकती.. इस तरह सुसाइड करना कानूनी अपराध है एक मासूम लड़की को सुसाइड करने के लिए उकसाने के जुर्म में, मैं तुम्हें जेल में डाल दुंगा...
किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था की यह सब क्या हो रहा है,, सभी हैरानी से कभी अनन्या की तरफ तो कभी उस पुलिस वाले की तरफ देख रहे थे,,, तनु अभी भी वहीं इन सब बातों से बेखबर जड़ बनी आंखों में आंसू लिए अपने परिवार को देख रही थी,,,,,
इसी मौके का फ़ायदा उठाकर अनन्या दौड़ते हुए अन्दर चौथी मंजिल की सीढ़ियों तक आती है लेकिन ऊपर छत पर जाने का रास्ता बंद था वह चारों तरफ देखती है उसे  ऊपर जानें का कोइ दुसरा रास्ता नहीं मिलता,,,,,,
अनन्या छत के दरवाजे के बिल्कुल पास में खड़ी होकर जोर से चिल्लाती है जैसे किसी ने उसे पीछे से चोट मारी हों,,,,,,
अनन्या की इतनी तेज आवाज सुनकर तनु का फोन नीचे गिर जाता है वह दौड़ते हुए दरवाजे के पास आकर दरवाजा खोलती है सामने मुस्कुराते हुए हाथ बांधकर अनन्या खड़ी थी,,,,,,
तनु, हैरानी से उसे देखते हुए- तुम... कौन हो तुम..? और यहां क्यों आई हों....
अनन्या छत पर आकर वापस दरवाजे को लॉक कर देती है और तनु के पास आकर - तुम्हारी सुसाइड पार्टनर....
तनु, आंखों में आंसू लिए अनन्या से थोड़ा दूर जाकर - मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो... मर जाने दो मुझे... तुम चली जाओ यहां से.....
अनन्या, उसके पास आकर - अच्छा चली जाऊंगी, पहले ये बताओ तुम सुसाइड क्यों करना चाहती हो...?
तनु वहीं छत पर दीवार का सहारा लेकर बैठ जाती है, अनन्या भी उसके पास आकर बैठती है,,,,,,,
तनु, रोते हुए- धोखा दिया है उसने मुझे.... पांच साल तक वह मुझसे प्यार का झूठा नाटक करता रहा और मैं... मैंने पागलों की तरह उससे प्यार किया... जिंदगी समझ बैठी थी उसे... परसों हमारी इंगेजमेंट होने वाली थी लेकिन दो दिन पहले ही रोहन मुझे छोड़कर चला गया...... मैने अपने फ़्यूचर के सपने देखें थे उसके साथ और वो......
अनन्या, मुस्कुराते हुए- तो ऐसा कौनसे प्रेम पुराण में लिखा है कि प्रेमी छोड़कर चला जाए तो सुसाइड कर लेना चाहिए.......
तनु, रोते हुए अपनी आंखें बंद करके- मैं उसके बिना नहीं जी सकती...., अभी भी उतना ही प्यार करती हूं... मैं नहीं भुला पाऊंगी उसे...
अनन्या - तो अब तक किसका वेट कर रही थी... यहां से कूदी क्यों नहीं...? मर जाना चाहिए था अब तक तो....
तनु कुछ नहीं बोलती वह अभी भी अपनी आंखें बंद किए बैठी थी,,,,
अनन्या- तुम्हारे डेड ने बात की थी रोहन से.... पता हैं उसने क्या कहा...।
तनु, अनन्या की तरफ देखकर - क्या... क्या कहा उसने.....?
अनन्या - उसने कहा कि तुम मर भी जाओगी ना तो भी उसे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला....वह किसी और के साथ मनाली में वेकेशन मना रहा है....(फिर हंसते हुए तनु की तरफ देख कर) - और तुम यहां उसकी याद में अपनी जिंदगी की बलि चढ़ा रही हो....
अनन्या की बात सुनकर तनु और जोर जोर से रोने लगती है अनन्या उसके कंधे पर हाथ रखकर - क्या प्यार केवल एक लड़के और लड़की के बीच होने वाली फीलिंग्स का ही नाम है..... ऐसा तो कहीं नहीं लिखा हुआ...। क्या तुमने कभी अपने पेरेंट्स के प्यार को महसूस किया हैं कभी अपने भाई की लड़ाई में छुपा प्यार देखा हैं... शायद नहीं वरना तुम ऐसा करने की सोचती भी नहीं... तुम एक अनजान लड़के के प्यार के खातिर अपनी जान दे सकती हो तो तुम्हारा परिवार तो तुमसे कितना प्यार करता है वह भी अपनी जान दे सकते हैं ना, तुम्हें रोहन के छोड़कर जाने का इतना दुख हो रहा है सोचो अगर तुम अपने परिवार को छोड़कर चली जाओगी तो उनका क्या हाल होगा.... तनु अपनी लाइफ को second chance दो..... ये जिंदगी तुम्हारी है उसे किसी और के नाम मत करो.... फिर से वो जिंदगी शुरू करो जिसमें कोई रोहन नहीं था केवल आजाद परिंदे सी उड़ती तुम थी... और तुम्हारा परिवार था... देखना तुम्हारा सच्चा हमसफ़र खुद- ब -खुद चलकर तुम्हारे पास आएगा..... अपनी जिंदगी को दूसरों के हवाले करने से पहले उसे खुद के हवाले करो... किसी और से प्यार करने से पहले खुद से प्यार करना सीखो... अपने दिल को इतना मजबूत बनाओ की ऐसे हजारों रोहन आए तो भी टूट के बिखर ना सके.....
तनु अपने आंसू पोछते हुए -क्या मैं अपनी जिंदगी को सेकंड चांस देने से पहले रोहन के दिए धोखे को भुला पाऊंगी...
अनन्या - अगर किसी के एक धोखे से जिंदगी खत्म हो जाती तो अब तक छ-सात बार सुसाइड कर लेना चाहिए था मुझे....
तनु, हैरानी से उसकी तरफ देखकर - मैं कुछ समझी नहीं.....
अनन्या दीवार के सहारे अपना सिर टिका लेती हैं फिर आंखें बंद करके अपने अतीत को याद करते हुए- पांच साल की थी मैं जब मेरी सगी दादी मुझे  अनाथ आश्रम में अकेला छोड़कर चली गई थी,बहुत रोई थी मैं.... बहुत गिड़गिड़ाई थी उनके सामने वापस जाने के लिए लेकिन कोई फायदा नहीं था उन्होंने मेरी एक बात भी नही सुनी, वो मेरी जिंदगी का पहला धोका था....  15 साल की हुई तब अनाथ आश्रम वालों ने भी निकाल दिया, वहां से एक अंकल अपने साथ ले गए.. पढ़ाई का पूरा खर्चा उन्होंने उठाया बदले में, मैं उनके घर में काम करती रही.. लेकिन दो साल बाद चोरी का इल्जाम लगाकर उन्होंने भी मुझे घर से बेदखल कर दिया... ट्वेल्थ क्लास के बाद स्कॉलरशिप से कॉलेज गई, दो साल तक स्कॉलरशिप के पैसों से हॉस्टल की फीस भरी, लेकिन लास्ट ईयर में फीस नहीं भरने के कारण हॉस्टल वालों ने भी निकाल दिया....
कॉलेज की किसी दोस्त के साथ एक साल रही लेकिन कॉलेज खत्म होते ही वह भी छोड़कर चली गई.....
(अनन्या मुस्कुराते हुए) तुम्हारे रोहन की तरह मेरी जिंदगी में  भी एक लड़का आया था,, हम दोनों अच्छे दोस्त थे..
एक दूसरे के साथ प्रॉब्लम्स शेयर करते थे... उसके साथ रहकर लगने लगा था फिर जिंदगी में किसी और से धोखा नहीं मिलेगा यही मेरी लाइफ का सोलमेट हैं लेकिन कुछ दिनों बाद ही वह मेरे पास अपनी शादी का कार्ड लेकर पहुचा..... You know, मैं भी उस वक्त बिलकुल टूट गई थी तुम्हारी तरह... ना किसी का प्यार था ना दोस्ती और ना कोई और सहारा था मेरे पास... लेकिन इतने धोखे खाने के बाद भी मैंने अपनी जिंदगी को दूसरा मौका दिया खुद से प्यार करना सीखा.. जिंदगी की कीमत पता चली.. इतनी ठोकरे खाने के बाद मालूम चला कि ये मेरी जिंदगी है.... इस पर केवल मेरा हक हैं.....अगर मैंने अपनी जिंदगी को उस वक्त दूसरा मौका नहीं दिया होता तो आज जो मैं हूं वो मैं नहीं होती.....। क्या तुम अभी भी यहीं कहोगी कि तुम रोहन के धोखे को भूल नहीं सकती.... अगर मैं इतनी ठोकरे खाकर भी तुम्हारे सामने हूं तो तुम्हारे साथ तो तुम्हारा पूरा परिवार है उन सब का प्यार है... जो तुमसे प्यार नहीं करता,, तुम्हारा सम्मान नहीं कर सकता.. तुम उसके साथ अपनी पूरी जिंदगी खुश होकर बिता पाती जितना प्यार तुमने रोहन से किया उसका फिफ्टी परसेंट भी तुम अपने आप से, अपने परिवार से करना.. तुम्हें दुनिया की सारी खुशियां मिल जाएगी और उन्हीं खुशियों में तुम्हें तुम्हारा सच्चा हमसफ़र भी मिल जाए... 
अनन्या अपनी बात पूरी करके तनु की तरफ देखती हैं जो केवल उसे ही देख रही थी,, तनु के चेहरे से उदासी के बादल छट चुके थे.. उसकी आंखों में एक भी आंसू नहीं था,, उसके चहरे पर एक नयी चमक थीं जैसे उसे जिंदगी से फिर उम्मीद मील गई हो...
अनन्या खड़ी होकर सीढ़ीओ की ओर आने लगती है फिर पीछे मुड़कर अनु की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए-तुम्हारी जिंदगी तुम्हारे हाथ में है अब तुम पर डिपेंड करता है कि तुम इसे एक और मौका देती हो या अपने झूठे प्यार की खातिर इसे खत्म कर लेती हो....
इतना कहकर अनन्या छत का दरवाजा खोलकर नीचे जाने लगती है तभी पीछे से तनु दौड़ते हुए आकर अनन्या को गले लगा लेती हैं और बोलती है - थैंक यू सो मच... मेरी जिंदगी को दूसरा मौका देने के लिए.. मैं अपनी लाइफ का नया चैप्टर शुरू करूंगी जिसमें केवल मेरी जिंदगी मेरी होगी.... जिस इंसान ने मेरी फीलिंग्स की जरा भी कद्र नहीं की उससे लिए मैं अपने परिवार के प्यार को नहीं ठुकरा सकती... अब मुझे ख़ुद पर शर्म आ रही हैं की मैने अपनी फैमिली को इग्नोर करके इतना बड़ा फैसला किया....
अनन्या मुस्कुराते हुए तनु के बालों में हाथ फेरते हुए -अपने आप को दोष मत दो इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है तुम्हारी जगह कोइ ओर भी होता तो वह भी पहली बार में ऐसा ही करने की सोचता मगर तुम तो काफी समझदार निकली इतनी जल्दी समझ गई... खैर अब निचे चलकर अपने परिवार से मिलो वो कब से तुम्हारे लिए परेशान हो रहे हैं..... और आगे से याद रखना ये जिन्दगी तुम्हारी हैं,,,,
तनु हा में सिर हिलाती है,,,,
दोनों सीढ़ियों से नीचे आती है नीचे अभी भी उतनी ही भीड़ थी लेकिन सबके चेहरे पर मुस्कुराहट थी क्योंकि अनन्या और तनु के बीच हुई सारी बातें उसके फोन से नीचे सुनाई दे रही थी,,,,,,
तनु अपने पेरेंट्स के पास आती है और उनके गले लग कर रोते लगती हैं,,,,,
तनु, अपने पिता के सामने कान पड़कर रोते हुए - I am sorry dad...प्लीज मुझे माफ कर दीजिए... आगे से कभी आपको मेरी वजह से सिर नहीं झुकाना पड़ेगा... आगे से ऐसी कोई गलती नहीं करुंगी जो आपको हर्ट करे....
तनु के पिता तनु के सिर पर हाथ फेरते हुए- नहीं... हमें बिल्कुल शर्मिंदगी नहीं है बेटा... तुमने जानबूझकर थोडी ही ये कदम उठाया हैं...
तनु की मॉम अनन्या के पास आकर हाथ जोड़ते हुए- थैंक्यू बेटा... आज तुम्हारी वजह से हमें हमारी बेटी वापस मिल गई... इतनी मुश्किलों के बाद भी तुम्हारे पैर नहीं डगमगाए तुम बहुत बहादुर और समझदार हो....
अनन्या मुस्कुराते हुए- नहीं आंटी.. इसमें न तनु की गलती है ना मेरी समझदारी.... गलती ये है कि हम बचपन से किताबों में यही पढ़ते आ रहें हैं कि प्यार ही जिंदगी है लेकिन यह नहीं समझ पाते कि जिन्दगी हैं तो प्यार हैं.... 
सब लोग केवल अनन्या को देख रहे थे,,,,अनन्या वहां से जाने लगती है तभी पीछे से तनु की आवाज आती है - अब तो बता दो, तुम कौन हो.....?
अनन्या पीछे मुड़कर मुस्कुराते हुए - तुम्हारे शहर की नयी कलेक्टर आईएएस अनन्या सिंह.... कल ही यहां पोस्टिंग हुईं थीं...,
फिर थोड़ा आगे जाकर वापस तनु की तरफ देखकर- और हां... यूपीएससी ने भी दो बार धोखा दिया था उसके बाद जाकर ये मंजिल मिली है और सच्चा हमसफ़र भी....
इतना कहकर अनन्या वहां से चली जाती हैं सारी भीड़ एक साथ तालियां बजा रही थी वहा केवल अनन्या कि समझदारी और हौसलो कि बाते हो रही थी,,,, पुलिस वालों को पहले से पता था इसलिए वो भी अनन्या के पीछे-पीछे आ जाते हैं,,,,,,
अनन्या अपनी कार के पास आती है अंदर से एक आदमी दरवाजा खोलकर - अब चले... हमसफर के साथ एक लंबे सफर के लिए....
अनन्या मुस्कुराते हुए अंदर बैठकर - चलिए पतिदेव...
दोनों वहां से निकल जाते हैं...…..
(हैप्पी एंडिंग)

मनीषा नेटवाल✍️✍️....

कितनी अजीब बात है ना आज टीवी इंडस्ट्री, फिल्म इंडस्ट्री से लेकर कहानियों, कविताओं और गजलों में केवल लव स्टोरीज ने अपनी दुनियां बना ली है , अगर किसी मूवी या टीवी सिरियल में लव स्टोरी नही दिखाई जाए तो उसकी टीआरपी डाउन हो जाती हैं और अगर कहानियां में लव स्टोरी ना हो तो रीडर स्टोरी को ओपन तक नही करते.... मगर ये जो बेहद, बेइंतहा, खुबसूरत मोहब्बत के किस्से हैं वो केवल काल्पनिक दुनियां में ही अच्छे लगते है,,,, रियल लाइफ में पता नहीं कितनो की जिन्दगिया इन कहानियों के चक्कर में ख़राब हो जाती हैं
अपने इंडिया में जितनी मूवीज लव स्टोरीज पर बनती हैं ना उसकी आधी भी साइंस और टेक्नोलॉजी पर बनती तो अपना देश जहा हैं उससे दो क़दम आगे होता........
It's only my thoughts......


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